डेटा लीक से जुड़ी चिंताओं के बीच मास्टरकार्ड ग्राहक परेशान, बैंकों से नहीं मिल पा रहा ठोस जवाब

क्रेडिट व डेबिट कार्ड से जुड़े डेटा लीक होने की खबरों के बीच बैंकों की ओर से मास्टरकार्ड और वीजा पर आधारित कार्ड जारी करना बंद करने की अटकलें हैं। इस बीच ग्राहकों को भी परेशानी झेलने से जुड़ी जानकारी सामने आ रही हैं। कई ग्राहकों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि प्रमुख बैंक मास्टरकार्ड व वीजा से जुड़े डेबिट और क्रेडिट कार्ड नहीं जारी कर रहे हैं। वहीं मौजूदा कार्ड ग्राहकों को भी इसके संचालन से जुड़ी कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। बड़े पैमाने पर ग्राहकों के कार्ड एक्सपायर होने के बाद उन्हें नए कार्ड नहीं मिल पा रहे हैं। उससे भी बड़ी दिक्कत यह है कि ग्राहकों को बैंकों की ओर से न तो कोई मदद ही नहीं मिल पा रही है न ही कोई आधिकारिक जानकारी।
पहले भी विवादों में रहा है मास्टरकार्ड
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मास्टरकार्ड पर 2021 में भी कार्रवाई की थी। डेटा स्थानीयकरण मानदंडों का पालन न करने के कारण मास्टरकार्ड को भारत में नए ग्राहकों को शामिल करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। जुलाई 2021 से जून 2022 तक चले इस प्रतिबंध के दौरान मास्टरकार्ड को घरेलू ग्राहकों को नए डेबिट, क्रेडिट या प्रीपेड कार्ड जारी करने से रोक दिया गया था। मास्टरकार्ड की ओर से संतोषजनक अनुपालन सुनिश्चित करने करने के बाद जून 2022 में यह प्रतिबंध हटा दिया गया था।
परेशानी झेलने को मजबूर मास्टरकार्ड ग्राहक, नहीं हो रहा समाधान
बैंकिंग जगत से जुड़े जानकारों का दावा है कि बैंकों की ओर से जारी होने वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड के मामले में पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर ग्राहक परेशान हैं, खासकर, मास्टरकार्ड के ग्राहक। ऐसी स्थिति बनी है डेटा लीक होने से जुड़ी अटकलें सामने आने के बाद। बड़े पैमाने पर मौजूदा ग्राहकों ने संचालन से जुड़ी परेशानी झेलने की भी शिकायत की है। हालांकि, मास्टरकार्ड और बैंक इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी टिप्पणी करने से बच रहे हैं। कोटक महिन्द्रा बैंक से जुड़े एक आधिकारिक सूत्र ने डॉटकॉम से बातचीत में बताया कि सभी बैंकों को डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का पालन करना होता है, तब ही वह बैंक डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी कर सकता है।
क्या आरबीआई जांच के कारण मास्टकरकार्ड ग्राहकों को हो रही परेशानी?
उन्होंने बताया कि इसके लिए आरबीआई बैंकों के आईटी विभाग का ऑडिट करता है, जिसमें यह देखा जाता है कि खाताधारकों का डेटा सुरक्षित रखने के लिए बैंक कितनी सुरक्ष लेयर का इस्तेमाल करता है और बैंक का डेटा कितना सुरक्षित है। आरबीआई इसके लिए बैंकों के आईटी विभाग का तीन बार ऑडिट करता है, जिसमें डेटा से जुड़ी सभी पुख्ता जानकारी देखी और जांची जाती है। यदि बैंक की सुरक्षा लेयर अच्छी और मजबूत है, तब ही वह डेबिट व क्रेडिट कार्ड जारी कर सकता है। अगर इन तीनों ऑडिट में से कहीं भी कोई कमी मिलती है, तो वह बैंक किसी भी तरह के क्रेडिट और डेबिट कार्ड खाताधारकों को जारी नहीं कर सकता है। बैंकों को इन तीनों आईटी ऑडिट को पास करना पड़ता है। सूत्रों का दावा है कि संभवत: मास्टरकार्ड से जुड़े प्रकरण में भी ऐसा ही कोई मामला अंदरखाने चल रहा है, जिसकी जांच हो रही है और शायद इसी कारण ग्राहकों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।





