हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: जयपुर कंज्यूमर कोर्ट को अलवर होटल मामले में क्या दिलचस्पी?

Rajasthan High Court ने अलवर के Siliserh Lake के पास स्थित ‘देसी ठाठ’ होटल मामले में कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एडवोकेट जनरल से सवाल किया कि जयपुर कंज्यूमर कोर्ट का इस मामले में आखिर क्या “पर्सनल इंटरेस्ट” था, जो न केवल होटल की सील हटाने के आदेश दिए गए, बल्कि खुद कंज्यूमर कोर्ट के अध्यक्ष जी.एल. मीना मौके पर पहुंचकर आदेश की पालना करवाने लगे।

दरअसल, यूआईटी ने दिसंबर 2025 में सिलीसेढ़ झील और जयसमंद बांध के बहाव क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ‘देसी ठाठ’ समेत करीब 13 होटल और ढाबों को सील किया था। जांच में सामने आया था कि कई निर्माण अवैध थे और संबंधित जमीनों का कन्वर्जन भी नहीं हुआ था। बाद में हाईकोर्ट ने भी होटल को सील करने के आदेश बरकरार रखे थे।

होटल संचालक को एडीजे कोर्ट और हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला जयपुर कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा। करीब तीन महीने पहले कंज्यूमर कोर्ट ने होटल की सील हटाने के आदेश दिए, जिसके बाद होटल दोबारा खोल दिया गया। हालांकि, कानूनी जानकारों ने सवाल उठाए कि अलवर क्षेत्र के विवाद में जयपुर कंज्यूमर कोर्ट ने किस आधार पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान यूआईटी के वकील अजय शुक्ला ने हाईकोर्ट को बताया कि यह मामला जयपुर कंज्यूमर कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आता था। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो कंज्यूमर कोर्ट अध्यक्ष को भी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है। फिलहाल होटल को फिर से सील कर दिया गया है और मामले की सुनवाई जारी है।

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