सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर रहे हैं गहलोत: राजेंद्र राठौड़

बीजेपी नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने अरावली को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। रविवार को जयपुर स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राठौड़ ने कहा कि अरावली मुद्दे पर गहलोत के साथ उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस भी खड़ी नजर नहीं आती।

राठौड़ ने कहा कि हाल ही में गहलोत ने सोशल मीडिया पर ‘Save Aravalli’ अभियान चलाते हुए अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदली, लेकिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सचिन पायलट में से किसी ने भी प्रोफाइल पिक्चर नहीं बदली। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि जिस अभियान की बात की जा रही है, उसे पार्टी का समर्थन भी नहीं है और यह केवल राजनीतिक दिखावा है।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अशोक गहलोत सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या कर रहे हैं और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। राठौड़ ने गहलोत के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि 90 प्रतिशत अरावली समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह असत्य और भ्रामक है।

राजेंद्र राठौड़ के अनुसार अरावली का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और आरक्षित वनों में आता है, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा पूरे अरावली क्षेत्र में से केवल लगभग 2.56 प्रतिशत क्षेत्र ही सीमित, नियंत्रित और कड़े नियमों के तहत खनन के दायरे में आता है।

राठौड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को दिए अपने आदेश में अरावली के संरक्षण और खनन नियमन की रूपरेखा तय की है। कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेतृत्व में गठित समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अरावली से जुड़े जिलों में स्थित कोई भी भू-आकृति, जो आसपास के क्षेत्र से कम से कम 100 मीटर ऊंची हो, उसे ‘अरावली हिल्स’ माना जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे पहले 8 अप्रैल 2005 को भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना में यही मानदंड तय किया गया था, जिसे कांग्रेस सरकारों ने भी लागू रखा था। इसके बावजूद अब अशोक गहलोत सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या कर रहे हैं।

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