पुरानी पेंशन बहाली पर कॉन्फेडरेशन का ऐलान, बोले कर्मचारी नहीं चाहते नई पेंशन व्यवस्था

केंद्रीय कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने मंगलवार को देशभर में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया। आठवें वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों (टीओआर) में बदलाव, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और अन्य लंबित मांगों को लेकर सभी कार्यस्थलों पर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद मांगों का एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

कॉन्फेडरेशन के महासचिव एस.बी. यादव ने बताया कि प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों की मांगों का चार्टर कैबिनेट सचिव को भेजा गया है। इसमें राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम द्वारा दिए गए सुझावों को शामिल करते हुए आठवें वेतन आयोग की टीओआर में संशोधन की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि सरकार केवल व्यापार करने में आसानी नहीं, बल्कि कर्मचारियों के जीवन और सामाजिक सुरक्षा पर भी ध्यान दे।

मांग पत्र में प्रमुख रूप से 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता/महंगाई राहत को मूल वेतन/पेंशन में मिलाने, 1 जनवरी 2026 से वेतन और पेंशन पर 20 प्रतिशत अंतरिम राहत (आईआर) देने, नई पेंशन योजना (NPS/UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग शामिल है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि किसी भी परिस्थिति में पेंशनभोगियों के बीच भेदभाव नहीं किया जाए।

कॉन्फेडरेशन ने कहा कि कोविड-19 के दौरान रोकी गई महंगाई भत्ते की तीन किस्तों (18 माह) का भुगतान किया जाए और पेंशन के परिवर्तित हिस्से की बहाली 15 साल की जगह 11 साल में की जाए। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति पर लगी 5 प्रतिशत की सीमा हटाने, सभी विभागों में रिक्त पद भरने, आउटसोर्सिंग व निगमीकरण बंद करने और संविदा, आकस्मिक व जीडीएस कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग भी उठाई गई है।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आगे और व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

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