टैरिफ विवाद के बीच रत्न व आभूषण कारोबार में तेजी; जुलाई में निर्यात 16% बढ़ा, जानें आयात का क्या हाल

अमेरिका की टैरिफ धमकियों के बीच भारतीय रत्न एवं आभूषण व्यापार में तेजी देखी गई है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2025 के दौरान रत्न एवं आभूषणों का कुल सकल निर्यात 15.98 प्रतिशत बढ़कर 2178.24 मिलियन डॉलर (18756.28 करोड़ रुपये ) हो गया है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 1878.09 मिलियन डॉलर (15700.0 करोड़ रुपये) था।

रत्न एवं आभूषण का आयात 26.55 प्रतिशत बढ़ा
रत्न एवं आभूषणों के कुल आयात पर नजर डाले तो जुलाई 2025 में यह 26.55 प्रतिशत बढ़कर 1810.43 मिलियन डॉलर (5587.73 करोड़ रुपये) हो गया है। जबकि पिछले साल इस अवधि में यह 1430.55 मिलियन डॉलर (11956.04 करोड़ रुपये ) था।

टैरिफ की चिंताओं ने डाला असर
यह भारी वृद्धि अगस्त 2025 से टैरिफ के खतरों के बचाव के लिए जुलाई के दौरान की गई व्यापारी खरीदारी के कारण हुई है। क्योंकि भारत में त्योहारों और शादियों का मौसम शुरू होने जा रहा है, जबकि पश्चिम में छुट्टियों का मौसम शुरू होने वाला है, इसलिए व्यापार एक बड़ा हिस्सा जुलाई में ही समाप्त हो गया। साथ ही मौसमी मांग से अलग कई ऐसे कारण है, जैसे कि हल्के और समकालीन डिजाइनों में उत्पादों के नए कलेक्शन ने युवा वैश्विक उपभोक्ताओं को आकर्षिक किया है। जबकि भारत और यूएई सीईपीए जैसे व्यापार समझौते के माध्यम से बाजार में पहुंच सुधार को बढ़ाया है।

कटे और पॉलिश किए हुए हीरों के निर्यात में वृद्धि
आंकड़ों के अनुसार कटे और पॉलिश किए हुए हीरों का जुलाई में कुल सकल निर्यात 1071.73 मिलियन डॉलर (9230.66 करोड़ रुपये) दर्जे किया गया, जो पिछले साल की इस अवधि के 910.13 मिलियन डॉलर (7608.79 करोड़ रुपये) की तुलना में 17.76% (रुपये में 21.32%) की वृद्धि दर्शाता है।

निर्यात वृद्धि का श्रेय वैश्विक खरीदारों द्वारा कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका के बीच स्टॉक में वृद्धि को दिया जा सकता है। साथ ही बेहतर गुणवत्ता मानकों और नए व उभरते बाजारों में निर्यात को बढ़ावा देने को जाता है।

कटे और पॉलिश किए हुए हीरों के आयात में वृद्धि
इसी तरह जुलाई में कटे और पॉलिश हीरों का कुल सकल आयात 113.75 मिलियन डॉलर (980.65 करोड़ रुपये) रहा, जो पिछले साल इस वर्ष की समान अवधि के 86.160 मिलियन डॉलर (720.13 करोड़ रुपये) के मुकाबले 32.02 प्रतिशत (रुपये में 36.18 प्रतिशत) की वृद्धि को दर्शाता है। आयात में वृद्धि निर्माताओं और व्यापारियों ने त्योहारों और शादियों के मौसम से पहले ही इन्वेंट्री की खरीदारी बढ़ा दी है।

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