यूपी एमएलसी चुनाव में सपा का बड़ा उलटफेर, भाजपा के लिए बोया बीज और फसल काट ले गई अखिलेश की पार्टी

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत ने राजनीतिक समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। इस जीत के पीछे उनकी वर्षों की मेहनत, शिक्षकों के बीच मजबूत पकड़ और वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का समर्थन अहम माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जिस जमीन को तैयार करने में भाजपा के नेताओं का भी सहयोग मिला, उसका फायदा आखिरकार समाजवादी पार्टी को मिला।
डॉ. आकाश अग्रवाल ने वर्ष 2020 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने शिक्षकों के बीच अपना आधार मजबूत करने पर लगातार काम किया। बताया जाता है कि पिछले दो वर्षों से वह भाजपा के संपर्क में थे और इस दौरान शिक्षकों के बीच अपनी पकड़ बढ़ाते रहे। हालांकि, अंतिम समय में भाजपा ने हरिकिशोर तिवारी को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया।
इसके बाद डॉ. आकाश अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी से संपर्क किया। सपा ने पहले घोषित प्रत्याशी डॉ. चंद्र प्रकाश गुप्ता की जगह डॉ. आकाश अग्रवाल पर भरोसा जताया। इस फैसले का पार्टी को फायदा मिला और आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन सीट पर सपा अपनी जीत दर्ज कराने में सफल रही।
वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों पर लगाया दांव
डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत में वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की भूमिका अहम रही। आगरा जिले में करीब 40 राजकीय विद्यालय, 109 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज और 920 वित्तविहीन विद्यालय हैं। विद्यालयों की संख्या के लिहाज से वित्तविहीन क्षेत्र काफी बड़ा है।
डॉ. अग्रवाल ने इसी वर्ग के शिक्षकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को उठाया और उनके बीच अपना समर्थन आधार तैयार किया। चुनाव के दौरान यह रणनीति उनके लिए फायदेमंद साबित हुई। वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का समर्थन उनकी जीत का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
चंद्र प्रकाश के अनुभव और संपर्क भी आए काम
समाजवादी पार्टी ने शुरुआत में पूर्व जीआईसी प्राचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश गुप्ता को प्रत्याशी घोषित किया था। सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के बीच उनकी अच्छी पकड़ और पुराने संपर्कों को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया था। हालांकि, बाद में टिकट डॉ. आकाश अग्रवाल को दे दिया गया।
टिकट कटने के बावजूद डॉ. चंद्र प्रकाश सपा प्रत्याशी के समर्थन में जुटे रहे। पार्टी ने उनकी नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी दी।
डॉ. चंद्र प्रकाश के पास सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के बीच समर्थन आधार था, जबकि डॉ. आकाश अग्रवाल की मजबूत पकड़ वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों में थी। दोनों के समर्थन आधार का मेल सपा के लिए फायदेमंद साबित हुआ और चुनावी मुकाबले में पार्टी की स्थिति मजबूत हुई।
फर्जी मतदाताओं को लेकर भी उठा था विवाद
चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित फर्जी मतदाताओं को शामिल किए जाने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े कुछ मतदाताओं को लेकर शिकायतें सामने आई थीं।
हरिकिशोर तिवारी और डॉ. चंद्र प्रकाश की ओर से भी इस मामले में शिकायत किए जाने की बात सामने आई थी। शिकायतों के बाद मतदाता सूची में संशोधन किया गया। इसके बाद आगरा जिले में शिक्षक मतदाताओं की संख्या 16,380 से घटकर 15,788 रह गई।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी लखनऊ में प्रेसवार्ता के दौरान आगरा में करीब 10 हजार फर्जी मतदाता बनाए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, डॉ. आकाश अग्रवाल की ओर से इस संबंध में कोई शिकायत नहीं किए जाने की बात सामने आई।
जीत के बाद मतगणना प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष
जीत का प्रमाणपत्र मिलने के बाद डॉ. आकाश अग्रवाल ने मतगणना प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें 14 हजार से अधिक मत मिले और जीत का अंतर 4,200 से ज्यादा वोटों का रहा।
इससे पहले मंगलवार को उन्होंने मतगणना में धांधली के आरोप लगाए थे। मतगणना स्थल पर मंगलवार रात हुई मारपीट की घटना को लेकर उन्होंने कहा कि मतगणना कक्ष की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, जिससे यह स्पष्ट हो सकता है कि घटना की शुरुआत किसने की थी।
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, मतगणना कक्ष में पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि जीत का अंतर काफी अधिक होने के कारण कुछ मतों के खारिज होने से परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। विपक्ष की ओर से शिकायत किए जाने की स्थिति में वह भी अपना पक्ष रखेंगे।
चुनावी घटनाक्रमों पर जताई चिंता
डॉ. आकाश अग्रवाल ने चुनाव के दौरान हुई घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि इन घटनाक्रमों से शासन-प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर उनकी धारणा प्रभावित हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को डराया-धमकाया गया तथा बूथ कैप्चरिंग की कोशिशें हुईं।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान बने हालात के कारण वह मानसिक तनाव और भावावेश में थे, जिसके चलते उन्होंने धर्म परिवर्तन को लेकर प्रतिक्रिया दी थी। उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
भाजपा की रणनीति का फायदा सपा को मिला
आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन सीट का परिणाम बताता है कि शिक्षक राजनीति में केवल राजनीतिक दलों का समर्थन ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और मतदाताओं के बीच लंबे समय से बनाया गया आधार भी निर्णायक भूमिका निभाता है।
डॉ. आकाश अग्रवाल ने वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के बीच अपनी पकड़ का लाभ उठाया, जबकि डॉ. चंद्र प्रकाश के संपर्कों ने सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के बीच समर्थन जुटाने में मदद की। दोनों के समर्थन आधार के मेल से सपा को जीत हासिल करने में मदद मिली। इस तरह आगरा की शिक्षक सीट पर बदले चुनावी समीकरणों ने भाजपा के लिए तैयार की गई जमीन का फायदा समाजवादी पार्टी को पहुंचा दिया।





