
लखनऊ के चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है, जबकि घटना के समय उसके साथ मौजूद सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। करीब आठ साल पुराने इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच और एसआईटी जांच के बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया चली।
चश्मदीद ने बताई थी घटना की कहानी
घटना के वक्त विवेक तिवारी की एसयूवी में उनकी सहकर्मी सना मौजूद थीं। सना के मुताबिक, विवेक रात करीब 12:30 बजे उन्हें घर छोड़ने जा रहे थे। इसी दौरान दो पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उन्हें रोकने की कोशिश की।
सना ने बताया कि एक पुलिसकर्मी ने एसयूवी पर डंडा मारा। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने अपनी बाइक एसयूवी के सामने लगा दी। विवेक ने बाइक से बचकर निकलने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान बाइक एसयूवी से टकरा गई। सना के बयान के मुताबिक, इसके तुरंत बाद करीब दो मीटर की दूरी से एक पुलिसकर्मी ने गोली चला दी।
गोली लगने के बाद भी विवेक एसयूवी चलाकर वहां से निकलने की कोशिश करते रहे। बाद में शहीद पथ अंडरपास के पास वाहन अनियंत्रित होकर एक खंभे से टकरा गया। तकनीकी जांच में एसयूवी की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक बताई गई थी।
अस्पताल पहुंचने में लगा काफी वक्त
घटना के बाद घायल विवेक को अस्पताल ले जाया गया। उन्हें देर रात करीब 2:05 बजे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, रात 2:25 बजे उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने करीब 20 मिनट तक उनका इलाज किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
बिना आर्म्स ट्रेनिंग पिस्तौल देने पर भी उठे थे सवाल
मामले की मजिस्ट्रियल जांच में प्रशांत चौधरी को मुख्य आरोपी बताया गया था। जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि उसे बिना आर्म्स ट्रेनिंग के पिस्तौल जारी की गई थी। तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उन्होंने 15 पन्नों की रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी थी।
रिपोर्ट में कल्पना, चश्मदीद सना, दोनों आरोपियों और घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि हत्या किसी साजिश के तहत नहीं की गई थी।
एसआईटी ने भी की थी मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने एसआईटी को जांच सौंपी थी। लंबी जांच के बाद एसआईटी ने आरोपपत्र दाखिल किया। जेल में बंद सिपाही संदीप कुमार को बाद में जमानत मिल गई थी।
आठ साल बाद आया फैसला
17 सितंबर 2026 को अदालत ने प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया, जबकि संदीप कुमार को बरी कर दिया। फैसले के बाद विवेक की पत्नी कल्पना ने कहा कि वह निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और ऊपरी अदालत में अपील करेंगी। उन्होंने कहा कि वह न्याय मिलने तक अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।
विवेक तिवारी हत्याकांड की टाइमलाइन
- 28 सितंबर 2018: रात करीब 1:30 बजे विवेक तिवारी को गोली मारी गई।
- 29 सितंबर: प्रशांत और संदीप के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज हुई।
- 2 अक्तूबर: एसआईटी ने घटनास्थल पर क्राइम सीन रीक्रिएट किया।
- 4 अक्तूबर: चश्मदीद सना का बयान दर्ज हुआ।
- 19 दिसंबर: पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
- 17 सितंबर 2026: अदालत ने प्रशांत चौधरी को दोषी ठहराया और संदीप कुमार को बरी किया।





