आरबीआई का टाटा संस पर बड़ा फैसला: एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने की याचिका ठुकराई, क्या है लिस्टिंग कनेक्शन?

टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की ओर से एनबीएफसी यानी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी का लाइसेंस सरेंडर करने के लिए दिया गया आवेदन खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना और मजबूत हो गई है।
आरबीआई ने क्यों खारिज किया आवेदन?
मामले से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई ने शनिवार को टाटा संस के कंपनी सचिव और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को इस संबंध में पत्र भेजा। इसमें केंद्रीय बैंक ने बताया कि कंपनी एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने के लिए जरूरी निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करती है।
टाटा संस ने मार्च 2024 में खुद को एनबीएफसी श्रेणी से बाहर करने के उद्देश्य से डी-रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था। कंपनी चाहती थी कि उसका एनबीएफसी पंजीकरण समाप्त कर दिया जाए। हालांकि, आरबीआई के मुताबिक इसके लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं होने के कारण आवेदन स्वीकार नहीं किया गया।
अब लिस्टिंग क्यों मानी जा रही है जरूरी?
आरबीआई के इस फैसले का सबसे बड़ा असर टाटा संस की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग पर पड़ सकता है। टाटा संस को आरबीआई के नियमों के तहत अपर-लेयर एनबीएफसी के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।
नियमों के मुताबिक, अपर-लेयर श्रेणी में शामिल एनबीएफसी के लिए सार्वजनिक शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना जरूरी है। ऐसे में लाइसेंस सरेंडर करने का रास्ता बंद होने के बाद टाटा संस के सामने अब लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का विकल्प प्रमुख हो गया है।
लिस्टिंग से बचने की अटकलों पर लगा विराम
टाटा संस के एनबीएफसी दर्जे से बाहर निकलने के आवेदन के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि कंपनी अपना एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर कर सार्वजनिक लिस्टिंग की अनिवार्यता से बच सकती है। आरबीआई के आवेदन खारिज करने के फैसले से फिलहाल इन संभावनाओं पर विराम लग गया है।
अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि टाटा संस लिस्टिंग की प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाती है और इसके लिए संभावित समयसीमा क्या रहती है।
आरबीआई और टाटा संस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले पर खबर लिखे जाने तक आरबीआई और टाटा संस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। मीडिया की ओर से प्रतिक्रिया मांगे जाने पर आरबीआई के जवाब का इंतजार था, जबकि टाटा संस की तरफ से भी तत्काल कोई बयान जारी नहीं किया गया।
आगे क्या होगा?
एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने की कोशिश नाकाम होने के बाद टाटा संस के लिए नियामकीय स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। अपर-लेयर एनबीएफसी के तौर पर कंपनी को संबंधित नियमों का पालन करना होगा।
ऐसे में आने वाले समय में टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग की प्रक्रिया, उसकी समयसीमा और कंपनी की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर निवेशकों और कॉरपोरेट जगत की नजर रहेगी।





