तीन-भाषा नियम पर सुप्रीम कोर्ट की दखल, केंद्र, CBSE और NCERT से चार सप्ताह में मांगा जवाब

कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य करने संबंधी सीबीएसई की नई भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब तलब किया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने इस नीति को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सभी पक्ष निर्धारित समय में अपना पक्ष रखें, ताकि अगली सुनवाई में मामले पर विस्तार से विचार किया जा सके।
किन लोगों ने दायर की हैं याचिकाएं?
इस मामले में अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाओं में केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, गोपाल शंकरनारायणन और मुकुल रोहतगी ने अदालत के समक्ष कई व्यावहारिक और कानूनी सवाल उठाए।
याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि तीन भाषाएं अनिवार्य करने की व्यवस्था शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की भावना के विपरीत है और छात्रों पर बिना पर्याप्त विकल्प के भाषाएं थोपी जा रही हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि कई राज्यों में अभी तक सभी भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं और न ही पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षक मौजूद हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि एक जुलाई तक 22 भाषाओं में किताबें उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पुस्तकें ही उपलब्ध हैं। ऐसे में इस नीति को लागू करने में शिक्षकों, संसाधनों और बुनियादी ढांचे की गंभीर चुनौती सामने आएगी।
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि यदि कोई छात्र अब तक अंग्रेजी और फ्रेंच पढ़ रहा था और अचानक उसे कक्षा 9 में तमिल या किसी अन्य भारतीय भाषा का अध्ययन करना पड़े, तो उसके लिए आवश्यक शिक्षक और शैक्षणिक व्यवस्था कहां से उपलब्ध कराई जाएगी।
क्या है नई भाषा नीति?
सीबीएसई ने 15 मई 2026 को जारी सर्कुलर में घोषणा की थी कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना आवश्यक होगा। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप लागू की गई है।
बोर्ड के अनुसार, यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो उसे पहले दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा को तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुना जा सकेगा।
तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का बोझ न बढ़े, इसलिए कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) की परीक्षा फिलहाल नहीं ली जाएगी। साथ ही, जब तक नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक छात्र कक्षा 6 के 2026-27 संस्करण की तीसरी भाषा की पुस्तकों का उपयोग कर सकेंगे।
अब इस मामले में सभी की नजर 29 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जहां सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी के जवाब पर आगे की सुनवाई करेगा।





