फारस की खाड़ी में जहाजों पर हमले का असर, विदेश मंत्रालय बोला- सबसे ज्यादा भारतीय नाविक हुए शिकार

फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हालिया हमलों को लेकर भारत ने गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में तनाव कम करने, जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने तथा सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील करता है।
हमलों में भारतीय नाविकों को सबसे अधिक नुकसान
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हालिया हमलों में सबसे अधिक प्रभावित भारतीय नाविक हुए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि जिन दो जहाजों पर हमला हुआ, उनमें कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। एक जहाज पर मौजूद 12 भारतीयों में से एक नाविक की मौत हो गई, जबकि दूसरे जहाज पर सवार 18 भारतीयों में से 9 घायल हुए हैं। इनमें दो नाविकों की हालत गंभीर बताई गई है।
भारत ने इस घटना को लेकर ईरानी अधिकारियों के समक्ष अपनी गहरी चिंता और कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की घटनाएं तुरंत रुकनी चाहिए और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए सभी पक्षों को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर जोर
रणधीर जायसवाल ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। भारत लगातार इस मार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और व्यापार बाधित न होने की वकालत करता रहा है। उनका कहना था कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
पीओके और दक्षिण चीन सागर पर भी रखा भारत का पक्ष
प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शनों पर भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने कहा कि वहां के लोगों का आक्रोश दशकों से जारी शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन का परिणाम है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान देने और उसे जवाबदेह ठहराने की अपील की।
वहीं दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर भारत ने दोहराया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुसार समुद्री मार्गों और हवाई क्षेत्र में निर्बाध आवाजाही का समर्थन करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सभी समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में होना चाहिए।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान ही सबसे प्रभावी रास्ता है।





