यूपी में बदलते वोट प्रतिशत का खेल, राजनीतिक दलों के सामने वोटरों का मूड बनाए रखने की चुनौती

Vउत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक दल वोटरों के रुझान को अपने पक्ष में बनाए रखने और बदलने की कोशिशों में जुटे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में सामने आए जनादेश ने प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण जरूर बनाए, लेकिन इन नतीजों के आधार पर अगले विधानसभा चुनाव में बहुमत का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

एनडीए की कोशिश 2024 के लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई करने की है, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन उस चुनाव में मिले समर्थन को आगे भी बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

2024 के नतीजों से क्या तस्वीर बनी?

2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को विधानसभा क्षेत्रों के आधार पर देखें तो सपा 403 में से 184 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी। कांग्रेस 39 और एनडीए 174 सीटों पर बढ़त में था। इन आंकड़ों के आधार पर किसी भी गठबंधन को विधानसभा में पूर्ण बहुमत नहीं मिलता।

यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने और वोटरों के रुख को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं।

सिर्फ वोट प्रतिशत से तय नहीं होता चुनावी नतीजा

2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीतकर बढ़त बनाई, लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में वह भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन से पीछे रहा। हालांकि दोनों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर ज्यादा नहीं था।

चुनावी गणित में वोट प्रतिशत के साथ उसका अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वितरण भी अहम माना जाता है। किसी पार्टी का समर्थन अगर बड़ी संख्या में विधानसभा क्षेत्रों में समान रूप से मौजूद हो, तो उसका असर सीटों की संख्या पर भी पड़ सकता है।

यूपी में कई बार बदला है वोटरों का रुख

प्रदेश के चुनावी इतिहास में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं के रुझान में बदलाव कई बार देखने को मिला है।

2004 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 35 सीटों के साथ बढ़त बनाई थी, जबकि उसे 26.74 प्रतिशत वोट मिले थे। बसपा को नौ सीटें और 12.04 प्रतिशत वोट मिला था। इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई।

इसी तरह 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 23 सीटों के साथ बढ़त हासिल की और बसपा का वोट प्रतिशत 27.42 प्रतिशत रहा। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 71 सीटें जीतीं और उसका वोट प्रतिशत 42.13 प्रतिशत रहा। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने बहुमत हासिल किया। 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के पक्ष में यह चुनावी रुझान देखने को मिला।

कांग्रेस संगठन में सक्रियता पर जोर

2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में संगठन को सक्रिय करने के लिए आंतरिक समीक्षा और ग्रेडिंग प्रक्रिया पर जोर दिया है। पार्टी के मुताबिक, जिला अध्यक्षों के कामकाज का मूल्यांकन किया जा रहा है और उन्हें ए, बी और सी श्रेणियों में बांटने की तैयारी है।

अब तक 39 सचिवों के इंटरव्यू होने की बात सामने आई है। पार्टी संगठन सृजन अभियान के तहत निष्क्रिय पदाधिकारियों की जगह नए और सक्रिय चेहरों को मौका देने की तैयारी कर रही है।

निष्क्रिय पदाधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

पार्टी की योजना के अनुसार सी श्रेणी में आने वाले यानी अपेक्षाकृत निष्क्रिय जिला अध्यक्षों को नोटिस देकर हटाया जा सकता है। उनकी जगह प्रतिभा खोज अभियान से सामने आए युवा नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संगठन की निगरानी के लिए एआईसीसी सचिवों को अपने प्रभार वाले राज्यों में महीने के 15 से 20 दिन रहकर संगठनात्मक गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

2027 से पहले यूपी में राजनीतिक दलों का फोकस वोटरों के रुझान के साथ-साथ बूथ और संगठन स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने पर भी है। ऐसे में आने वाले महीनों में बदलते वोट प्रतिशत और क्षेत्रवार जनसमर्थन चुनावी समीकरण की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेंगे।

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