अयोध्या चढ़ावा चोरी मामला: जांच में खुलासा, AI कैमरे लगाने का प्रस्ताव हुआ नजरअंदाज

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच में एक के बाद एक नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि पुलिस ने कई बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर परिसर में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित कैमरे लगाने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी थी। हालांकि इन सुझावों पर अमल नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने मंदिर परिसर के कुछ स्थानों को सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बताया था। इन जगहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और एआई कैमरों के जरिए निगरानी की सिफारिश की गई थी, लेकिन ट्रस्ट स्तर पर इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली। एसआईटी जांच में इन तथ्यों का उल्लेख होने की बात सामने आई है।
राम मंदिर देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां सीआरपीएफ, एसएसएफ, पीएसी, पुलिस और निजी सुरक्षा कर्मियों समेत करीब 2,500 जवान तैनात रहते हैं। इसके अलावा एटीएस की एक टीम भी स्थायी रूप से सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करती है।
जांच में यह भी सामने आया कि मंदिर परिसर में आने-जाने वाले वाहनों की स्कैनिंग के लिए करीब छह वर्ष पहले लगभग 60 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक स्कैनिंग प्रणाली लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि बजट स्वीकृत न होने के कारण यह योजना अब तक फाइलों में ही अटकी हुई है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एआई कैमरे लगाए गए होते तो परिसर में आने-जाने वाले संदिग्ध और अपराधी पुलिस की निगरानी में तुरंत आ जाते। कैमरे अपराधियों के डेटाबेस से मिलान कर उनकी पहचान, लोकेशन और गतिविधियों की तत्काल जानकारी उपलब्ध करा सकते थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकती थी।





