हवा से वायरस पकड़ने की तकनीक विकसित: ‘प्रोजेक्ट ब्रीद’ से इमारतें खुद बनेंगी संक्रमण के खिलाफ ढाल

कोरोना महामारी के बाद इनडोर एयर क्वालिटी को लेकर दुनियाभर में रिसर्च तेज हो गई है। इसी दिशा में अमेरिकी सरकार की एजेंसी एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी फॉर हेल्थ (ARPA-H) ने ‘प्रोजेक्ट ब्रीद’ शुरू किया है। करीब 1,250 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य ऐसी स्मार्ट इमारतें विकसित करना है, जो हवा में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों की तुरंत पहचान कर उनसे खुद ही निपट सकें।
फिलहाल हवा में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया की पहचान के लिए लैब जांच में कई घंटे या कई दिन लग जाते हैं। इस दौरान संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी की पर्यावरण इंजीनियर डॉ. लिंसी मार और उनकी टीम ने ऐसा सेंसर विकसित किया है, जो रियल-टाइम में हवा में मौजूद खतरनाक कणों की पहचान कर सकता है।
हालिया परीक्षण में इस सेंसर ने अस्थमा बढ़ाने वाले डस्ट माइट की तुरंत पहचान की। वर्तमान में यह तकनीक कोरोना वायरस, इन्फ्लूएंजा और ई-कोलाई सहित 10 प्रकार के रोगजनकों की पहचान करने में सक्षम है। वैज्ञानिक इसकी क्षमता बढ़ाकर पहले 25 और भविष्य में 100 प्रकार के पैथोजन्स तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
इस परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक किसी इमारत में फायर अलार्म सिस्टम की तरह काम करेगी। जैसे ही सेंसर हवा में वायरस या एलर्जी बढ़ाने वाले तत्वों का पता लगाएगा, बिल्डिंग का कंट्रोल सिस्टम स्वतः सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद वेंटिलेशन सिस्टम, यूवी लाइट और एयर फिल्टर चालू होकर हवा को शुद्ध करने का काम करेंगे। डे-केयर सेंटर और अस्पतालों में यह सिस्टम हवा के प्रवाह का विश्लेषण कर ताजी हवा का प्रवाह भी बढ़ा सकेगा।
हालांकि, कुछ वैज्ञानिक इस तकनीक को महंगी और जटिल मानते हैं। उनका कहना है कि बेहतर वेंटिलेशन और कार्बन डाइऑक्साइड सेंसर जैसे उपाय अधिक व्यावहारिक हो सकते हैं। वहीं, प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए ऐसी उन्नत तकनीकों का विकास जरूरी है।
‘प्रोजेक्ट ब्रीद’ का पहला वास्तविक परीक्षण वर्ष 2028 में अमेरिका के वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर और कुछ डे-केयर सेंटरों में किया जाएगा। यदि परीक्षण सफल रहा, तो भविष्य में घर, स्कूल, अस्पताल और कार्यालय केवल इमारतें नहीं, बल्कि संक्रमण से सुरक्षा देने वाले स्मार्ट हेल्थ सिस्टम के रूप में काम कर सकेंगे।





