Supreme Court of India का बड़ा बयान पिछड़े वर्ग के आधार पर नियमों में छूट नहीं

Supreme Court of India ने सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि नियम और अनुशासन सर्वोपरि हैं। अदालत ने कहा कि केवल पिछड़े वर्ग से संबंध रखने के आधार पर किसी उम्मीदवार को नियमों में छूट नहीं दी जा सकती।

‘दान-दया’ के लिए नहीं है जगह

जस्टिस Dipankar Datta और जस्टिस Satish Chandra Sharma की पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक रोजगार में चैरिटी या सहानुभूति के लिए कोई स्थान नहीं है। सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर नियमों में ढील देना अन्य योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।

सभी पर समान नियम लागू

अदालत ने कहा कि यदि भर्ती नियमों में स्पष्ट है कि किसी चरण के लिए दूसरा अवसर नहीं दिया जाएगा, तो यह नियम सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होना चाहिए, चाहे उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो।

क्या है मामला

यह मामला दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल भर्ती से जुड़ा है। एक अभ्यर्थी तय तिथि पर शारीरिक दक्षता परीक्षण में शामिल नहीं हुआ और बाद में बीमारी का हवाला देते हुए दूसरा मौका मांगने लगा। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण और दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे राहत देते हुए दूसरा मौका देने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला

दिल्ली पुलिस की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि समय पर उपस्थित न होना उम्मीदवार की लापरवाही और उत्साह की कमी को दर्शाता है, जो पुलिस जैसी सेवाओं के लिए उपयुक्त नहीं है।

अंततः शीर्ष अदालत ने अभ्यर्थी की दोबारा मौका देने की मांग खारिज कर दी और साफ कर दिया कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों से समझौता नहीं किया जा सकता।

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