डोनाल्ड ट्रंप बोले – एक हमले में साफ हुआ ईरान का शीर्ष नेतृत्व, ‘अब सरेंडर के मूड में है नया शासन’

पश्चिम एशिया की रणभूमि से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और इज़राइल के साझा सैन्य अभियान में ईरान के 48 कद्दावर नेताओं का सफाया कर दिया गया है। ट्रंप के अनुसार, यह सर्जिकल स्ट्राइक इतनी सटीक थी कि एक ही झटके में ईरानी शासन की रीढ़ टूट गई है। फ्लोरिडा के मार-ए-लागो से इस पूरे मिशन की निगरानी कर रहे ट्रंप ने इस ऑपरेशन को उम्मीद से कहीं अधिक सफल और तेज़ बताया है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ एक तरफ आसमान से मिसाइलें बरस रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप का दावा है कि ईरान की नई लीडरशिप ने घुटने टेकने के संकेत दिए हैं और वे वाशिंगटन के साथ मेज पर बैठकर बातचीत करने के लिए तैयार हो गए हैं।
सटीक निशाना और नेतृत्व का पतन: ट्रंप ने गिनाईं सैन्य अभियान की सफलताएं
फॉक्स न्यूज और सीएनबीसी के साथ विशेष बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन की बारीकियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “दुनिया इस सफलता को देखकर दंग है। हमने एक ही स्ट्राइक में शासन चलाने वाले 48 अहम चेहरों को रास्ते से हटा दिया है।” ट्रंप का मानना है कि यह सैन्य कार्रवाई केवल अमेरिका के हित में नहीं, बल्कि वैश्विक शांति के लिए जरूरी थी। उन्होंने ईरानी शासन को इतिहास के सबसे हिंसक दौर का हिस्सा बताया और कहा कि इस ‘कैंपेन’ का मकसद उस आतंक की जड़ को काटना था जो दशकों से मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर रहा था। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी सेना अपने निर्धारित समय से काफी आगे चल रही है और जिस तेजी से यह मिशन आगे बढ़ा है, उसने तेहरान के सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
बातचीत की मेज पर नया ईरान: क्या झुकने को मजबूर हुआ तेहरान?
सबसे चौंकाने वाला खुलासा ट्रंप ने ईरान के नए नेतृत्व को लेकर किया है। न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स और ‘द अटलांटिक’ के हवाले से खबर है कि ईरान के नए आकाओं ने खुद अमेरिका से संपर्क साधा है। ट्रंप ने कहा, “ईरान के नए नेता अब सुलह चाहते हैं और मैं भी बातचीत के लिए राजी हो गया हूं।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ईरानी शासन को यह समझौता बहुत पहले कर लेना चाहिए था, लेकिन उनकी ‘चालाकी’ उन्हें भारी पड़ी। ट्रंप का दावा है कि जहाँ एक तरफ बमबारी हो रही है, वहीं ईरान के आम लोग इस बदलाव से खुश हैं और सड़कों पर जश्न मना रहे हैं। हालांकि, यह देखना बाकी है कि क्या यह ‘नेगोशिएशन’ वास्तव में शांति लाएगा या यह केवल युद्ध के बीच में एक कूटनीतिक पैंतरा है।
1979 के बाद सबसे बड़ा संकट: बारूद के ढेर पर खड़ा मिडिल ईस्ट
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और 48 अन्य नेताओं के सफाए के बाद ईरान 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद के सबसे गहरे संकट से गुजर रहा है। पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है, क्योंकि ईरान ने भी उन देशों पर पलटवार किया है जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह मिशन न केवल सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिश है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व के नक्शे को बदलने की एक बड़ी चाल भी हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस संभावित ‘शांति वार्ता’ पर टिकी हैं। क्या ईरान अपनी पुरानी नीतियों को छोड़कर अमेरिका की शर्तों पर समझौता करेगा या फिर यह संघर्ष किसी और भयानक अंजाम की तरफ बढ़ेगा?





