5 दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर बैंक कर्मियों का सांकेतिक आंदोलन

उत्तराखंड में सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने मंगलवार को 5 दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रशासनिक, क्षेत्रीय, जोनल कार्यालयों और शाखाओं में कर्मचारियों व अधिकारियों ने बैज पहनकर काम करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

इस दौरान बैंक कर्मियों ने केंद्र सरकार से लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। UFBU में देश की 9 राष्ट्रीय स्तर की बैंक कर्मचारी और अधिकारी यूनियनें शामिल हैं। यूनियनों का कहना है कि जहां केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, निजी संस्थानों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में पहले से 5-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, वहीं राष्ट्रीयकृत बैंक अब भी इससे वंचित हैं।

यूनियनों ने बताया कि 2023 के द्विपक्षीय समझौते में 5-दिवसीय कार्य सप्ताह पर सहमति बन चुकी थी, इसके बावजूद सरकार ने अब तक इसे लागू नहीं किया है। मार्च 2025 में प्रस्तावित बैंक हड़ताल को सरकार के आश्वासन के बाद अंतिम समय में स्थगित कर दिया गया था, लेकिन 9 महीने से ज्यादा समय बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इसी के चलते UFBU ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत 23 और 30 दिसंबर को प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 5 जनवरी 2026 को धरना दिया जाएगा। धरना कार्यक्रम के दौरान अंतिम हड़ताल की तारीख घोषित की जाएगी, जो जनवरी 2026 के तीसरे सप्ताह में संभावित है।

UFBU का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी, बढ़ते कार्यभार और मानसिक तनाव से जूझ रहा है। अधिकांश बैंकिंग सेवाएं अब डिजिटल हो चुकी हैं और एटीएम, सीडीएम, पासबुक प्रिंटिंग मशीन और नेट बैंकिंग जैसी सुविधाएं 24×7 उपलब्ध हैं। इसके बावजूद बैंक कर्मचारियों को 5-दिवसीय कार्य सप्ताह के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।

UFBU ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो बैंक कर्मचारी अनिवार्य हड़ताल के लिए मजबूर होंगे। यह विरोध कार्यक्रम एसबीआई के महासचिव एवं एआईबीओसी दिल्ली राज्य इकाई के चेयरपर्सन जतिंदर पाल सिंह सेठी के नेतृत्व में आयोजित किया गया।

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