सीआरपीएफ के 3.25 लाख कर्मियों के लिए अलर्ट, ऑपरेशनल सिक्योरिटी को जोखिम में डाल सकती है ये चूक

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफ’ के 3.35 लाख जवानों और अधिकारियों के लिए एक बड़ा अलर्ट है। ‘संभव एप’, जिस पर बल के सभी कार्मिकों की जानकारी उपलब्ध रहती है, उसे लेकर एक अनाधिकृत एप तैयार किया गया है। उस एप को ‘संभव एप्लीकेशन राइटर’ का नाम दिया गया है। ये एप, सोशल मीडिया प्लेटफार्म और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसमें दावा किया गया है कि यह एप सीआरपीएफ कार्मिकों के लिए स्वत: आवेदन तैयार कर देता है। सीआरपीएफ महानिदेशालय ने अपने सभी कार्मिकों को इस ‘एप’ को डाउनलोड/इंस्टॉल या उपयोग करने के लिए मना किया है। ‘संभव एप्लीकेशन राइटर’ पर जानकारी डालना, इससे फोर्स की ऑपरेशनल सिक्योरिटी, जोखिम में पड़ सकती है।
बता दें कि पांच वर्ष पहले सीआरपीएफ मुख्यालय ने अपने कार्मिकों के लिए ‘संभव’ मोबाइल एप तैयार कराया था। इस एप के जरिए वे अपनी वित्तीय एवं अन्य विभागीय जानकारी बिना किसी बाधा के जान सकते हैं। इसके लिए उन्हें ‘एप’ पर क्लिक करना होगा। ‘संभव’ एप को पीआईएस यानी पर्सनल इंर्फोमेशन सिस्टम की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
सीआरपीएफ मुख्यालय ने ‘संभव एप’ तैयार होने के बाद अपनी सभी यूनिट्स से कहा था कि वे अधिकारियों व जवानों के मोबाइल नंबर पीआईएस पर अपडेट करा दें। वजह, नया सिस्टम ‘संभव’ तभी काम करता है, जब संबंधित कर्मी का मोबाइल नंबर उसमें अपडेट होगा।
यदि किसी कर्मचारी का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, तो वह इस एप का प्रयोग नहीं कर सकेगा। उसे वेतन एवं विभागीय पीआईएस से जुड़ी कोई जानकारी या नोटिफिकेशन प्राप्त नहीं होंगे। नई व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए कर्मियों का मोबाइल नंबर मौजूदा पीआईएस में होना अनिवार्य था। सभी कार्मिकों से कहा गया था कि वे अपनी यूनिट में संपर्क कर यह चेक कर लें कि उनका मोबाइल नंबर, जो पहले से मौजूद है, क्या वह सही है। उसमें कोई अंक इधर-उधर तो नहीं हुआ है। यदि ऐसा हुआ तो संबंधित कर्मी को सेलरी, बिल और वेलफेयर से जुड़े नोटिफिकेशन नहीं प्राप्त होंगे।
बल मुख्यालय ने सोमवार को जारी दिशा निर्देशों में कहा है कि इस बात का पता चला है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे व्हाट्सएप और यू-ट्यूब आदि पर ‘संभव’ को लेकर एक एप होने की बात कही जा रही है। सोशल मीडिया समूहों में भी उक्त एप पर चर्चा हो रही है। इतना ही नहीं, गूगल प्ले स्टोर पर भी ‘संभव एप्लीकेशन राइटर’ मौजूद है। इस बाबत लगातार संदेश प्रसारित हो रहे हैं। इन संदेशों में दावा किया जा रहा है कि यह ‘एप’ बल कार्मिकों के लिए खुद ही आवेदन तैयार कर देता है। कार्मिकों को इस एप पर अपनी जानकारी डालनी होती है।





