अब कम ऊंचाई पर फट रहे बादल, 500 मिमी प्रति घंटे की रफ्तार से बरसती है तबाही

चंडीगढ़:  पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और फट रहे बादलों से हालात एक बार फिर से बदहाल होने लगे हैं। उत्तराखंड से लेकर हिमाचल प्रदेश में बादलों के फटने का जो सिलसिला शुरू हुआ उससे कई इलाकों में एक बार फिर से तबाही मचनी शुरू हो गई है। उत्तराखंड से लेकर हिमाचल प्रदेश और बीते कुछ वर्षों में पहाड़ी राज्यों में बादलों के फटने का जो ट्रेंड सामने आया है वह बेहद चौंकाने वाला है। उत्तर भारत के मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसून के वक्त तकरीबन पांच से छह हजार फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में बादलों के फटने की घटनाएं होती थी। लेकिन बीते कुछ वर्षों में लगातार हो रही बारिश और क्लाउडबर्स्ट में यह ऊंचाई पांच और छः हजार फीट की ऊंचाई से खिसक कर तीन से चार हजार फीट तक पर आ गई है। जो फिलहाल अब चिंता का कारण बनी हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है की नमी और हवाओं में दबाव की भिन्नता के चलते क्लाउडबर्स्ट की ऊचाई घटकर कम हो गई है।

मौसम विभाग के उत्तरी जोन के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर पवन यादव कहते हैं कि पिछले दो वर्षों से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ऐसे ही बड़ी तबाही मची थी। तब भी लगातार बादलों के फटने से हालात बदल गए थे। इस बार फिर से एक बार पुराने पैटर्न पर ही बादलों के फटने का सिलसिला शुरू हुआ है।

उनका कहना है कि बीते कुछ वर्षों में बादलों के बरसने की टाइमिंग भी बदली है और बादलों के फटने की ऊंचाई भी घटकर कम हो गई है। वह कहते हैं कि ऐसा बदलते हुए मौसम और क्लाइमेट चेंज के चलते ही हो रहा है। उनका मानना है कि नमी और हवाओं में दबाव की भिन्नता के चलते क्लाउडबर्स्ट की ऊचाई घटकर कम हो गई है। जो की बेहद चिंता की बात भी है।

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर यादव कहते हैं कि बीते दो वर्षों में जिस तरीके से बारिश ने पहाड़ी इलाकों मे तबाही मचाई थी उसका बड़ा कारण कम ऊंचाई पर बादलों का फटना भी था। वह कहते हैं जो की अमूमन बादलों के फटने की प्रक्रिया छः हजार फीट या उसके आस पास की ऊंचाई पर गुजरने वाले बादलों में होती थी। लेकिन पिछले कुछ समय से यह नोटिस किया जा रहा है कि जिन इलाकों में क्लाउडबर्स्ट हो रहा है वहां की ऊंचाई सामान्यतः होने वाले क्लाउडबर्स्ट की तुलना में बहुत कम है।

इस वक्त हिमाचल प्रदेश से लेकर उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों में बादलों के फटने की ऊंचाई चार हजार फीट तक पहुंच चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 2023 में जिस तरह से हिमाचल के कांगड़ा में बादल फटा था इतनी ऊंचाई वाले इलाकों में अमूमन बदल के फटने की घटनाएं नहीं होती थी। इस बार भी जिन इलाकों में बादल फटने की सूचनाएं आ रही है उनकी ऊंचाई भी सामान्यतः कम ही है।

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