20 जुलाई की हिंसा पर पुलिस की कार्रवाई तेज, प्रदर्शन से जुड़े लोगों की जांच शुरू

20 जुलाई 2026 को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में हिंसा के पीछे की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाया जाएगा।
पूर्व नियोजित हिंसा और आपराधिक तत्वों की भूमिका की जांच
क्राइम ब्रांच यह भी जांच करेगी कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पहले से सुनियोजित थी या प्रदर्शन स्थल पर कुछ आपराधिक तत्वों ने प्रवेश किया था। इसके अलावा पुलिसकर्मियों पर कथित हमले, पथराव, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस वाहनों को हुए नुकसान और प्रदर्शन के दौरान हुई अन्य घटनाओं से जुड़े साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 17 एफआईआर रद्द
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 20 जुलाई की हिंसा से संबंधित 17 एफआईआर पहले ही रद्द की जा चुकी हैं। अब क्राइम ब्रांच की जांच में हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं को देखा जा रहा है।
क्या हुआ था 20 जुलाई को?
20 जुलाई 2026 को नीट-यूजी समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सीजेपी ने संसद मार्च का आयोजन किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई।
पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की और पथराव किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।
घटना में 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। वहीं, पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों के पथराव में कई अधिकारियों समेत 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
सरकारी वाहनों और संपत्ति को भी नुकसान
दिल्ली पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद प्रदर्शन स्थल से हटने से इनकार किया और निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया। पुलिस के अनुसार, हिंसा के दौरान 15 से 20 सरकारी वाहनों और अन्य सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
अब क्राइम ब्रांच की जांच में हिंसा की पूरी कड़ी, आरोपियों की भूमिका और नुकसान से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।





