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दुनिया के कई देशों में महंगाई, कम वेतन, शिक्षा बजट में कटौती, भ्रष्टाचार और आवास संकट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस, इटली, बेल्जियम, अल्बानिया, पुर्तगाल, स्पेन, अर्जेंटीना और तुर्किये समेत कई देशों में लोग सड़कों पर उतरकर सरकारों की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। कुछ जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, जबकि कई शहरों में हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़पों की खबरें सामने आई हैं।

प्रदर्शनों के पीछे अलग-अलग देशों में स्थानीय समस्याएं हैं। कहीं बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, तो कहीं कम वेतन, महंगे मकान, शिक्षा बजट में कटौती और भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा देखने को मिल रहा है।

फ्रांस में कई शहरों में प्रदर्शन और हिंसा

फ्रांस के पेरिस, मार्सेली, नीस, नांत, बोर्दो, ल्योन और लिली समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में जीवन-यापन की बढ़ती लागत, ईंधन की कीमतों, घटती क्रय शक्ति और सार्वजनिक खर्च में कटौती से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। सरकारी इमारतों और दुकानों में तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएं हुईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

अल्बानिया में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ गुस्सा

अल्बानिया की राजधानी तिराना और तटीय शहर दुर्रेस में सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रधानमंत्री एदी रामा का इस्तीफा शामिल है। भ्रष्टाचार के आरोपों, रोजगार की कमी, विश्वविद्यालयों की फीस में बढ़ोतरी और भूमि विवाद को आंदोलन की प्रमुख वजह बताया गया है।

कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया तथा कई लोगों को हिरासत में लिया। प्रधानमंत्री ने इस्तीफे की मांग खारिज करते हुए सरकार की नीतियों का बचाव किया है।

इटली और बेल्जियम में भी विरोध प्रदर्शन

इटली के मिलान, बोलोग्ना, ट्यूरिन और रोम में महंगाई, कम वेतन और घटती क्रय शक्ति के मुद्दों पर प्रदर्शन हुए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए हिंसा की निंदा की।

वहीं, बेल्जियम के ब्रसेल्स और लीज में बजट कटौती, बढ़ती जीवन-यापन लागत और शिक्षा सुधारों के खिलाफ प्रदर्शन हुए। छात्रों और युवाओं ने विश्वविद्यालयों से जुड़े शुल्क और नीतियों का विरोध किया। कुछ जगहों पर पुलिस पर वस्तुएं फेंकने और वाहनों में आग लगाने की घटनाएं हुईं। गृह मंत्री ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

पुर्तगाल और स्पेन में महंगे मकानों का मुद्दा

पुर्तगाल के लिस्बन, पोर्टो और कोइम्ब्रा में कम वेतन, महंगाई, पेंशन सुधार और मकानों के बढ़ते किराए के खिलाफ प्रदर्शन हुए। किफायती आवास की कमी को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। रिपोर्ट के अनुसार, यहां कई प्रदर्शन शांतिपूर्ण मार्च के रूप में आयोजित किए गए।

स्पेन में भी बढ़ते किराए और किफायती मकानों की कमी के खिलाफ विरोध देखने को मिला। आवास संकट को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ने के बीच रिपोर्ट में सरकार की ओर से समयपूर्व चुनाव की घोषणा का भी उल्लेख किया गया है।

अर्जेंटीना में शिक्षा बजट कटौती का विरोध

अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के बजट में कटौती के खिलाफ छात्र संगठनों और मजदूर यूनियनों ने प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए शिक्षा क्षेत्र के लिए अधिक बजट की मांग की। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों की भी खबरें आईं।

तुर्किये और अमेरिका में भी विरोध

तुर्किये में महंगाई और अपर्याप्त पेंशन के खिलाफ पेंशनभोगियों तथा मजदूर संगठनों ने प्रदर्शन किए। वहीं, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन, युद्ध और घरेलू नीतियों के विरोध में विभिन्न शहरों में रैलियां आयोजित किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में है।

सरकारों के सामने चुनौती

अलग-अलग देशों में विरोध के मुद्दे भले ही अलग हों, लेकिन बढ़ती महंगाई, रोजगार, वेतन, शिक्षा और आवास जैसी समस्याएं लोगों की नाराजगी की प्रमुख वजह बनकर उभरी हैं। कई सरकारों ने हिंसा रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई की है, जबकि कुछ ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर अपना पक्ष रखा है।

इन घटनाओं के बीच शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर करना भी अहम है। जहां नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं आगजनी, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं से हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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