रेखा आर्या प्रकरण की जांच तेज, एसआईटी गठित; आठ सदस्यीय टीम खंगालेगी पूरे मामले के तथ्य

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े विवाद में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले की जांच के लिए एसपी देहात जया बलूनी की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। अस्पताल में भर्ती मंत्री की तबीयत में सुधार होने के बाद उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
पति के खिलाफ दर्ज कराई थी FIR
मंत्री रेखा आर्या ने गुरुवार रात अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने जालसाजी, जातिगत प्रताड़ना, मारपीट और जान से मारने की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद जांच की जिम्मेदारी आठ सदस्यीय टीम को सौंपी है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर विवाद
रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो और उसके साथ एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की थी। मंत्री का आरोप है कि ऑडियो में उनके पति एक महिला से बातचीत करते सुनाई दे रहे हैं और उनके खिलाफ जान से मारने की साजिश रचने की बात सामने आती है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहली शादी छिपाने और प्रताड़ित करने का आरोप
मंत्री ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनकी शादी वर्ष 2004 में बरेली निवासी गिरधारी लाल साहू से हुई थी। उनके मुताबिक, साहू ने अपनी पहली शादी और बच्चों की जानकारी उनसे छिपाई थी। रेखा आर्या ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उनके पति के दूसरी महिलाओं से संबंध होने की जानकारी मिली। इसको लेकर विरोध करने पर उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और गाली-गलौज की गई।
फर्जी हस्ताक्षर कर पद से हटाने का भी आरोप
रेखा आर्या ने आरोप लगाया है कि उनके पति ने कुछ दस्तावेजों पर कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर करके उन्हें कंपनी के निदेशक पद से हटाने की प्रक्रिया अपनाई, जबकि उन्होंने किसी भी पद से इस्तीफा नहीं दिया था। उन्होंने अपनी शिकायत में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का भी जिक्र किया है।
अब SIT करेगी आरोपों की जांच
एसपी देहात जया बलूनी के नेतृत्व में गठित आठ सदस्यीय टीम मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करेगी। मंत्री के बयान उनकी तबीयत में सुधार होने के बाद दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। मामले में सामने आए आरोपों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों की सत्यता जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस जांच पूरी होने और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।





