विदेश में MBBS करना आसान नहीं! एडमिशन से पहले जान लें NMC के जरूरी नियम, वरना बढ़ सकती है परेशानी

विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई कर भारत में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों के लिए जरूरी खबर है। जॉर्जिया से मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले भारतीय छात्रों की पात्रता को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अलग-अलग जवाबों से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। मामला इस बात से जुड़ा है कि जॉर्जिया में छह साल का मेडिकल कोर्स पूरा करने के बाद भारतीय छात्र भारत में विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (FMGE) देने के योग्य होंगे या नहीं।
कानूनी विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि कुछ शिक्षा सलाहकार आयोग के जवाबों में मौजूद अस्पष्टता का फायदा उठाकर छात्रों को विदेश में मेडिकल दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। ऐसे में छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी सलाहकार के दावे पर भरोसा करने से पहले NMC के नियमों और संबंधित देश में मेडिकल लाइसेंस की शर्तों की जांच जरूर करें।
NMC के दो जवाबों से क्यों पैदा हुआ भ्रम?
इस मामले में दो मेडिकल छात्रों ने प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल के माध्यम से NMC से पूछा था कि क्या जॉर्जिया से छह साल का एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के बाद वे भारत में FMGE परीक्षा देने के पात्र होंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने 24 सितंबर को दिए गए जवाब में कहा कि वर्ष 2021 के नियमों के अनुसार, विदेशी मेडिकल डिग्री की मान्यता के लिए छात्र को संबंधित देश में स्वतंत्र रूप से चिकित्सा करने का लाइसेंस प्राप्त होना जरूरी है।
हालांकि, 13 अक्टूबर को इसी विषय पर दूसरे छात्र को दिए गए जवाब में आयोग ने बताया कि स्वतंत्र रूप से चिकित्सा करने के लाइसेंस से संबंधित नियमों की जांच सक्षम अधिकारी और विशेषज्ञ समिति कर रही है।
इन दोनों जवाबों के बाद छात्रों के बीच यह सवाल उठने लगा कि जॉर्जिया से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों पर मौजूदा नियम किस तरह लागू होंगे।
शिक्षा सलाहकारों पर गुमराह करने के आरोप
दिल्ली हाईकोर्ट में मेडिकल मामलों की पैरवी करने वाले वकील सचिन जैन ने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षा सलाहकार विदेशी विश्वविद्यालयों से कमीशन मिलने के कारण छात्रों को अधूरी या भ्रामक जानकारी दे रहे हैं।
उनके मुताबिक, कुछ सलाहकार NMC के दूसरे जवाब का हवाला देकर छात्रों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि स्वतंत्र मेडिकल लाइसेंस की शर्त में बदलाव हो सकता है या इसका कोई वैकल्पिक रास्ता निकल सकता है।
विशेषज्ञों की चिंता है कि यदि छात्र ऐसे दावों पर भरोसा करके विदेश में दाखिला ले लेते हैं और बाद में उनकी डिग्री भारत में मान्यता की शर्तें पूरी नहीं करती, तो उन्हें भारत में डॉक्टर बनने की प्रक्रिया में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या NMC अपने स्तर पर नियम बदल सकता है?
वकील सचिन जैन के अनुसार, यदि संबंधित प्रावधान में बदलाव के लिए कानून संशोधन की आवश्यकता है, तो इसके लिए निर्धारित विधायी प्रक्रिया का पालन करना होगा। उनके मुताबिक, NMC अपने स्तर पर संसद से जुड़े कानूनी प्रावधानों को मनमाने ढंग से समाप्त नहीं कर सकता।
रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने शिकायत पोर्टल पर तीसरी बार भी यह स्पष्ट करने की मांग की कि आयोग के दोनों जवाबों में से किसे सही माना जाए। इसके जवाब में NMC ने फिर वर्ष 2021 के विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंस नियमों का हवाला दिया।
इससे छात्रों की पात्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हालांकि, किसी विशेष छात्र की पात्रता का अंतिम निर्धारण संबंधित नियमों, उसकी डिग्री और अन्य आवश्यक शर्तों के आधार पर ही किया जा सकता है।
जॉर्जिया में जूनियर डॉक्टर और स्वतंत्र डॉक्टर के अधिकार में अंतर
इस विवाद में जॉर्जिया के राष्ट्रीय शैक्षिक गुणवत्ता सुधार केंद्र (NCEQE) की ओर से जारी जानकारी भी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र का दावा है कि जॉर्जिया विदेशी मेडिकल छात्रों के लिए NMC की शर्तें पूरी करता है।
हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र अतिरिक्त परीक्षा के बिना जूनियर डॉक्टर के रूप में काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें स्वतंत्र रूप से मरीजों का इलाज करने का अधिकार नहीं मिलता। ऐसे में उन्हें उस डॉक्टर की देखरेख में काम करना होता है, जिसके पास स्वतंत्र रूप से चिकित्सा करने का लाइसेंस हो।
यही अंतर भारतीय छात्रों की पात्रता के मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी डॉक्टर की निगरानी में काम करने की अनुमति और स्वतंत्र रूप से चिकित्सा करने का लाइसेंस एक जैसी चीजें नहीं हैं।
भारत में डॉक्टर बनने के लिए क्या जरूरी है?
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड अजय कुमार सिंह के मुताबिक, विदेशी मेडिकल डिग्री हासिल करने के बाद भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण पाने के लिए संबंधित नियमों का पालन करना जरूरी है।
NMC के विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट संबंधी नियमों के तहत, संबंधित देश में स्वतंत्र रूप से चिकित्सा करने के लाइसेंस की शर्त महत्वपूर्ण है। केवल जूनियर डॉक्टर के रूप में काम करने या किसी वरिष्ठ डॉक्टर की निगरानी में इलाज करने की अनुमति इस शर्त के बराबर नहीं मानी जा सकती।
विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को यह समझना जरूरी है कि डिग्री हासिल करना अपने आप में भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण की गारंटी नहीं है। उन्हें निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं और लागू नियमों के अनुसार आवश्यक परीक्षा या अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है।
सरकार से क्या मांग कर रहे हैं विशेषज्ञ?
कानूनी विशेषज्ञों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC से मांग की है कि उन देशों और विदेशी मेडिकल विश्वविद्यालयों की सूची सार्वजनिक की जाए, जहां से पढ़ाई करने वाले छात्र भारत में मेडिकल लाइसेंस पाने की निर्धारित शर्तें पूरी कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने से छात्रों को सही फैसला लेने में मदद मिलेगी। इससे वे गलत दावों, भ्रामक सलाह और संभावित आर्थिक नुकसान से भी बच सकेंगे।
छात्रों के लिए जरूरी सलाह: विदेश में MBBS में दाखिला लेने से पहले NMC की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम नियमों की जांच करें। संबंधित देश में मेडिकल डिग्री के बाद मिलने वाले लाइसेंस, कोर्स की अवधि, इंटर्नशिप और भारत में पंजीकरण की शर्तों को लिखित रूप में समझें। केवल एजेंट या कंसल्टेंसी के आश्वासन के आधार पर दाखिला लेने से बचें।





