ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दिल्ली में सख्त पहरा: ड्रोन, साइबर हमले और संदिग्धों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर

भारत मंडपम में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन दिवस तक राजधानी में बहुस्तरीय और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए आयोजन स्थल, होटल, एयरपोर्ट और वीवीआईपी मार्गों को हाईटेक सिक्योरिटी ग्रिड से जोड़ा गया है।
सुरक्षा एजेंसियों का फोकस किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरे के संकेत पहले ही पकड़ने पर है। इसके लिए साइबर मॉनिटरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे, इंटेलिजेंस शेयरिंग और थ्रेट एनालिसिस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
साइबर हमलों पर भी पैनी नजर
सुरक्षा ग्रिड में मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) अहम भूमिका निभा रहा है। इसके जरिये साइबर हमले, हैकिंग और साइबर जासूसी से जुड़े इनपुट की निगरानी की जाएगी। किसी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी मिलने पर उसे संबंधित सुरक्षा और जांच एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा।
एआई कैमरों से संदिग्ध चेहरों की पहचान
सम्मेलन स्थल और संवेदनशील इलाकों में एआई तथा फेस-रिकग्निशन कैमरों से निगरानी की जा रही है। इनकी मदद से संदिग्ध चेहरों और गतिविधियों की पहचान करने की कोशिश की जाएगी। एयरपोर्ट, भारत मंडपम, वीवीआईपी होटलों और उन्हें जोड़ने वाली सड़कों पर भी सीसीटीवी और अन्य सर्विलांस सिस्टम सक्रिय रहेंगे।
कई एजेंसियों के बीच तालमेल
सुरक्षा व्यवस्था में आईबी, रॉ, एनआईए, एसपीजी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और बीएसएफ समेत प्रमुख एजेंसियों के बीच लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है। साइबर सुरक्षा से जुड़े इनपुट पर तकनीकी और साइबर इकाइयां नजर रख रही हैं, जबकि स्थानीय पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों और चेहरों की पहचान के लिए अलर्ट किया गया है।
संवेदनशील इलाकों में भी बढ़ी निगरानी
11 से 13 सितंबर तक होने वाले सम्मेलन को देखते हुए आयोजन स्थल और नई दिल्ली जिले में सुरक्षा का विशेष घेरा बनाया गया है। राजधानी के अन्य जिलों में भी पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। पार्क, जंगल, खाली मैदान, नालों के आसपास और अन्य सुनसान इलाकों पर खास निगरानी रखी जा रही है।





