तेल के दाम बढ़ने का खतरा! इंडोनेशिया में घटेगा पाम ऑयल उत्पादन, भारत की बढ़ेगी चिंता

खाद्य तेलों की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। इंडोनेशिया में भीषण अल-नीनो और सूखे के कारण क्रूड पाम ऑयल (सीपीओ) के उत्पादन में बड़ी गिरावट आने की आशंका जताई गई है। इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन (गैपकी) के मुताबिक, उत्पादन में करीब 50 लाख टन तक की कमी हो सकती है। इसका असर अगले साल की शुरुआत से वैश्विक बाजार में पाम ऑयल की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक है। ऐसे में वहां उत्पादन में कमी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, इंडोनेशियाई सरकार पाम आधारित बायोडीजल की ब्लेंडिंग बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इससे घरेलू स्तर पर पाम ऑयल की खपत बढ़ेगी और निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा कम हो सकती है।
अल-नीनो और सूखे से उत्पादन पर असर
इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन के चेयरमैन एडी मार्टोनो के अनुसार, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर पाम ऑयल उत्पादन पर पड़ सकता है। लंबे समय तक गर्म और शुष्क मौसम रहने से पौधों की देखभाल और उर्वरक के इस्तेमाल पर भी असर पड़ रहा है।
गैपकी ने करीब 5.3 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान जताया है। हालांकि, अल-नीनो का प्रभाव बढ़ने पर इसमें करीब 50 लाख टन तक की कमी आने की आशंका है। संगठन का कहना है कि उत्पादन में कमी का सबसे ज्यादा असर निर्यात पर पड़ सकता है।
बायोडीजल की बढ़ती मांग भी चुनौती
इंडोनेशिया में पाम ऑयल की घरेलू खपत बढ़ाने के लिए बायोडीजल मिश्रण पर जोर दिया जा रहा है। सरकार बी40 से आगे बढ़कर बी50 ब्लेंडिंग लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
गैपकी के अनुमान के अनुसार, बी50 नीति के तहत बायोडीजल के लिए घरेलू स्तर पर सालाना करीब 1.63 से 1.70 करोड़ टन पाम ऑयल की खपत हो सकती है। इसका मतलब है कि घरेलू मांग बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए उपलब्ध पाम ऑयल की मात्रा घट सकती है।
भारत पर क्यों पड़ेगा असर?
भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। पाम ऑयल भारत के खाद्य तेल आयात में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है और इसकी आपूर्ति मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से होती है।
ऐसे में इंडोनेशिया से निर्यात घटने और मलेशिया में भी मौसम संबंधी चुनौतियां बढ़ने पर भारत के लिए खाद्य तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। वैश्विक बाजार में पाम ऑयल की कीमत बढ़ने पर भारत में आयात लागत बढ़ने का दबाव भी बन सकता है।
पाम तेल महंगा हुआ तो दूसरे तेल भी प्रभावित
पाम ऑयल का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में खाद्य तेल के तौर पर किया जाता है और इसकी कीमतों का असर दूसरे खाद्य तेलों पर भी पड़ता है। अगर पाम ऑयल महंगा होता है तो उपभोक्ता और कारोबारी सोयाबीन, सूरजमुखी और सरसों तेल की ओर रुख कर सकते हैं।
इससे इन तेलों की मांग बढ़ सकती है और घरेलू बाजार में इनके दाम भी प्रभावित हो सकते हैं। हालिया बाजार रिपोर्टों में भी मौसम संबंधी चिंताओं, इंडोनेशिया में बायोडीजल की बढ़ती मांग और मजबूत खरीदारी के कारण भारत में खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी का उल्लेख किया गया है।
फिलहाल देश में खाद्य तेल का पर्याप्त स्टॉक
हालांकि, तत्काल तौर पर भारत में खाद्य तेल की उपलब्धता को लेकर बड़ी चिंता नहीं बताई गई है। बाजार में करीब 14-15 लाख टन खाद्य तेल का स्टॉक मौजूद है, जो लगभग डेढ़ महीने की घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त बताया गया है।
इसके अलावा सितंबर से सोयाबीन और मूंगफली की नई फसल की आवक शुरू होने की उम्मीद है। इससे घरेलू बाजार में खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है और आयात पर निर्भरता का दबाव कुछ कम हो सकता है।
भारत का खाद्य तेल आयात कितना है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 से अब तक भारत करीब 120 लाख टन खाद्य तेल का आयात कर चुका है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 116 लाख टन था। यानी इस साल अब तक करीब 4 लाख टन अधिक खाद्य तेल का आयात हुआ है।
भारत हर साल लगभग 160 लाख टन खाद्य तेल का आयात करता है। इसमें करीब 80 लाख टन पाम ऑयल होता है, जबकि बाकी करीब 80 लाख टन सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू मांग के अनुसार सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात का अनुपात बदलता रहता है।
क्या बढ़ेंगे भारत में तेल के दाम?
इंडोनेशिया में उत्पादन और निर्यात घटने की स्थिति में वैश्विक पाम ऑयल बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर भारत पर भी पड़ने की संभावना है, क्योंकि देश पाम ऑयल के आयात के लिए बड़े पैमाने पर इंडोनेशिया और मलेशिया पर निर्भर है।
हालांकि, भारत में पर्याप्त मौजूदा स्टॉक और घरेलू सोयाबीन-मूंगफली की नई फसल की आवक से तत्काल दबाव कुछ कम हो सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में खाद्य तेल की कीमतों की दिशा अंतरराष्ट्रीय पाम ऑयल आपूर्ति, मौसम, इंडोनेशिया की बायोडीजल नीति और घरेलू फसल की आवक पर निर्भर करेगी।





