उत्तराखंड में कांग्रेस की नई रणनीति, संगठन को मजबूत करने के लिए जिला और विधानसभा स्तर पर नियुक्तियां

उत्तराखंड में आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिला और विधानसभा प्रभारियों की घोषणा कर दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अनुमति के बाद प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रभारियों की सूची जारी की। प्रदेश उपाध्यक्षों, महासचिवों और सचिवों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जिला प्रभारियों को मिली जिम्मेदारी

प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप को पौड़ी, दर्शन लाल को हरिद्वार ग्रामीण, संजय जैन को रुड़की, संजय पालीवाल को पछुवादून, सतीश नैनवाल को ऊधमसिंह नगर, मधु को रुद्रपुर, हेमंत बगड़वाल को अल्मोड़ा और राजेंद्र पाल को चंपावत का जिला प्रभारी बनाया गया है।

महासचिवों को भी सौंपी गई जिम्मेदारी

प्रदेश महासचिव नीरज त्यागी को पुरोला, अभिषेक सिंह को उत्तरकाशी, वीरेंद्र पोखरियाल को टिहरी, राकेश राणा को देवप्रयाग, दीप शर्मा को रुद्रप्रयाग, नवीन जोशी को चमोली, राकेश पाल शाह को कोटद्वार ग्रामीण और अनिल भास्कर को कोटद्वार शहरी का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

इसके अलावा नरेंद्र राणा को हरिद्वार, राव शेर मोहम्मद को रुड़की, विजय गुनसोला को देहरादून, अरविंद प्रधान को परवादून, सुमित्तर भुल्लर को काशीपुर, शोभा बिष्ट को हल्द्वानी, गणेश उपाध्यक्ष को नैनीताल, संदीप चीमा को रानीखेत, पुष्कर जैन को बागेश्वर, संजय किरोला को पिथौरागढ़ और राजेंद्र को डीडीहाट की जिम्मेदारी दी गई है।

फ्रंटल संगठनों के प्रभारी भी नियुक्त

कांग्रेस ने प्रदेश उपाध्यक्षों को विभिन्न अनुषांगिक संगठनों, विभागों और प्रकोष्ठों की जिम्मेदारी भी सौंपी है। प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना को युवा कांग्रेस और एनएसयूआई का प्रभारी बनाया गया है। पूर्व विधायक मनोज रावत को एसआईआर कमेटी, लाल चंद शर्मा को सैनिक प्रकोष्ठ और राजीव महर्षि को प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दी गई है।

संगठन को मजबूत करने पर जोर

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार, जिला, विधानसभा और फ्रंटल संगठनों के प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करेंगे। साथ ही पार्टी के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने का काम करेंगे।

कांग्रेस की इस पहल को आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक तैयारियों को गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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