सस्ता कर्ज और जमीन से बढ़ेगा उत्पादन? अमिताभ कांत ने मैन्युफैक्चरिंग को लेकर दिया सुझाव

भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए कारोबार की लागत कम करना जरूरी है। नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने बैंकिंग व्यवस्था में सुधार, सस्ते कर्ज और उद्योगों के लिए जमीन की आसान उपलब्धता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि इन कदमों से कंपनियों को निवेश बढ़ाने और उत्पादन का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।
SLR में कटौती से कंपनियों को मिल सकता है सस्ता कर्ज
अमिताभ कांत ने भारत में मौजूदा 18 फीसदी वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) को अधिक बताते हुए इसमें कटौती की जरूरत जताई। SLR के तहत बैंकों को अपनी जमा देनदारियों का एक निर्धारित हिस्सा सुरक्षित परिसंपत्तियों, मुख्य रूप से सरकारी प्रतिभूतियों में रखना होता है।
कांत के मुताबिक, SLR में कटौती होने से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। इससे उद्योगों को वित्तीय सहायता मिलने और कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उन्होंने SLR को घटाकर कितना किया जाना चाहिए, इसके लिए कोई निश्चित लक्ष्य नहीं बताया।
केवल PLI योजना से नहीं बढ़ेगी मैन्युफैक्चरिंग
कांत ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए मददगार बताया, लेकिन कहा कि लंबे समय तक इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए कारोबार की लागत कम करना जरूरी है।
उनके अनुसार, कंपनियों को सस्ता कर्ज और पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में विस्तार करने का बड़ा अवसर है, लेकिन इसके लिए घरेलू स्तर पर मौजूद बाधाओं को दूर करना होगा।
जमीन और बिजली की लागत पर ध्यान देने की जरूरत
अमिताभ कांत ने कहा कि उद्योगों के विकास के लिए जमीन की उपलब्धता भी अहम है। भारत को चीन, वियतनाम और मैक्सिको जैसे देशों के अनुभवों से सीखने की जरूरत है। इन देशों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जमीन उपलब्ध कराने और लंबे समय के लिए पट्टे पर देने जैसे उपाय अपनाए जाते हैं।
उन्होंने बिजली की लागत और उपलब्धता को भी मैन्युफैक्चरिंग की वृद्धि से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। कांत के मुताबिक, उद्योगों को बिजली के लिए घरेलू उपभोक्ताओं की तुलना में अधिक भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में राज्यों को बिजली की लागत कम करने और उद्योगों के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
डेटा सेंटर और स्टार्टअप से भी पैदा होंगे रोजगार
अमिताभ कांत ने कहा कि पर्याप्त कर्ज की उपलब्धता नए क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप के विकास के लिए जरूरी है। भू-स्थानिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली छोटी कंपनियां वित्तीय संसाधनों की मदद से अपना विस्तार कर सकती हैं।
उन्होंने डेटा सेंटर से जुड़े रोजगार के अवसरों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, डेटा सेंटर के विकास से केवल तकनीकी सेवाओं में ही नहीं, बल्कि सर्वर, रैक और बिजली के उपकरण बनाने जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार पैदा हो सकते हैं। कांत ने बताया कि इन उपकरणों और संबंधित गतिविधियों पर डेटा सेंटर की कुल लागत का लगभग 45 फीसदी हिस्सा खर्च होता है।
कांत के सुझावों के मुताबिक, सस्ता कर्ज, जमीन की आसान उपलब्धता और बिजली की लागत में कमी जैसे कदम भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी मदद मिल सकती है।





