विश्व बैंक ने एआई को लेकर भारत की तैयारी को सराहा, निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई

विश्व बैंक की नई रिपोर्ट के मुताबिक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की तैयारी के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 10 उभरते बाजारों में शामिल है। रिपोर्ट में भारत की बड़ी तकनीकी कार्यबल, मजबूत आईटी क्षेत्र और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को इसकी प्रमुख ताकत बताया गया है।
विश्व बैंक की ‘इंडिया एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: सीजिंग द डेवलपमेंट अपॉर्चुनिटी’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एआई क्षेत्र में निजी निवेश 2024 के 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 4.1 अरब डॉलर हो गया। यानी एक साल में इसमें तीन गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई।
GCC में भी बढ़ी तकनीकी नौकरियां
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) में काम करने वाले पेशेवरों की संख्या भी बढ़ी है। 2024 में यह संख्या करीब 19 लाख थी, जो 2025 में बढ़कर 23.6 लाख हो गई।
विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने कहा कि भारत के लिए AI को केवल तकनीक के तौर पर नहीं, बल्कि विकास और उत्पादकता बढ़ाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। इससे सार्वजनिक सेवाओं में भी सुधार किया जा सकता है।
एआई से क्या फायदे और चुनौतियां?
विश्व बैंक के मुताबिक, AI श्रम उत्पादकता बढ़ाने, निर्यात के अवसर बढ़ाने और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसके दीर्घकालिक आर्थिक और रोजगार संबंधी प्रभावों को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि AI का लाभ व्यापक आबादी तक पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, AI तक पहुंच बढ़ाना और श्रमिकों के कौशल में सुधार करना जरूरी है।
AI अपनाने के लिए किन कदमों की जरूरत?
विश्व बैंक ने छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए AI अपनाने की बाधाओं को कम करने की जरूरत बताई है। इसके साथ ही स्थानीय AI नवाचार को बढ़ावा देने और स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ भौतिक एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे में सुधार और कार्यबल की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। स्थानीय जरूरतों के अनुरूप छोटे AI अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने से विकासशील क्षेत्रों को इसका अधिक लाभ मिल सकता है।





