मनीषा भानवाला का बड़ा बयान: बोलीं- रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं, ज्यादा से ज्यादा लड़कियां बनें विश्व चैंपियन

सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय पहलवान मनीषा भानवाला चाहती हैं कि उनकी इस उपलब्धि से देश की दूसरी महिला पहलवानों को भी विश्व चैंपियन बनने की प्रेरणा मिले। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं और उनकी इच्छा है कि भविष्य में अधिक से अधिक भारतीय महिला पहलवान विश्व चैंपियन बनें।

मनीषा ने शुक्रवार को महिला विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 के 59 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि और भारतीय महिला कुश्ती के भविष्य को लेकर विचार साझा किए।

‘रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं’

मनीषा ने कहा कि उनकी उपलब्धि का असली महत्व तब होगा, जब देश की अन्य महिला पहलवान भी विश्व चैंपियन बनेंगी और भारतीय कुश्ती में विश्व खिताब जीतना सामान्य बात बन जाएगी।

उन्होंने कहा, “रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही होते हैं और मैं चाहती हूं कि यह रिकॉर्ड और उपलब्धि भी आगे चलकर टूटे। मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा लड़कियां विश्व चैंपियन बनकर सामने आएं, ताकि भारतीय महिला पहलवानों का विश्व खिताब जीतना कोई अपवाद न रहकर एक सामान्य बात बन जाए।”

मनीषा ने आगे कहा कि भारतीय पहलवानों का लक्ष्य 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भी नए रिकॉर्ड बनाना होना चाहिए।

विश्व चैंपियनशिप में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

महिला विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल चार पदक जीते। भारतीय टीम ने एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक के साथ पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।

मनीषा भानवाला ने 59 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वहीं, नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। तनु शर्मा ने 72 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत की पदक संख्या चार पहुंचाई।

टीम रैंकिंग में भारत 94 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहा। अमेरिका, जापान, चीन और यूक्रेन की टीमें भारत से आगे रहीं। चार पदकों के साथ भारत ने महिला विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इससे पहले भारत ने 2012 और 2021 के संस्करणों में दो-दो पदक जीते थे।

साथी पहलवानों को दी धैर्य रखने की सलाह

मनीषा ने अपनी साथी पहलवानों नीलम सिरोही और काजल ढोचक को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी बड़ी प्रतियोगिता में मिली हार को अपने करियर का पैमाना नहीं बनाना चाहिए। खिलाड़ियों को मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखना चाहिए और अगले मौके की तैयारी करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कई बार दिन खिलाड़ी के अनुकूल नहीं होता। काजल के साथ भी ऐसा हुआ, जबकि नीलम के लिए इतने बड़े और कड़े मुकाबले में हिस्सा लेना एक नया अनुभव था। मनीषा ने उम्मीद जताई कि भविष्य में दोनों पहलवानों को और बेहतर परिणाम मिलेंगे।

उन्होंने कहा, “मेरी उन्हें यही सलाह है कि वे धैर्य बनाए रखें, क्योंकि आगे उनके लिए बहुत कुछ बेहतर होने वाला है।”

संघर्ष के बाद मिली ऐतिहासिक सफलता

मनीषा भानवाला ने अपने करियर में कई चुनौतियों और निराशाओं का सामना करने के बाद यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनका मानना है कि भारतीय महिला कुश्ती की अगली पीढ़ी के लिए धैर्य और निरंतर मेहनत बेहद जरूरी है।

मनीषा की इस जीत से भारतीय महिला कुश्ती को नई पहचान मिली है। अब उनकी नजर इस बात पर है कि देश की अन्य महिला पहलवान भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करें और आने वाले वर्षों में विश्व चैंपियनशिप तथा ओलंपिक में नए कीर्तिमान स्थापित करें।

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