आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत मंजूर, सात दिन बाद बाहर आएंगे; जानें पूरा मामला

दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को जमानत दे दी है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में हिरासत में लिया गया था। उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग के बीच अदालत का यह फैसला आया है।

पुलिस ने मांगी थी तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत

दिल्ली पुलिस ने बुधवार को दोनों नेताओं को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया था। पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। अदालत ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखा और बाद में दोनों को जमानत दे दी।

सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि देरी के बाद पार्टी के दोनों नेताओं को राहत मिली है। उनके मुताबिक, फिलहाल आदेश की प्रति नहीं मिली है, लेकिन जल्द मिलने की उम्मीद है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई थी गिरफ्तारी

आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद दोनों नेता पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैरिकेडिंग पार कर जंतर-मंतर परिसर में दाखिल हुए थे। वहां तिरंगा लहराकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की गई थी।

इसके बाद पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया था। 13 अक्तूबर को अदालत ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। बाद में उनकी हिरासत की अवधि भी बढ़ाई गई।

सीजेपी ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए थे सवाल

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दोनों नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि नेताओं को विरोध प्रदर्शन करने और तिरंगा लहराने के मामले में जेल भेजा गया। उन्होंने इसे विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया था।

वहीं, सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह की कार्रवाई से पार्टी के नेताओं को डराया नहीं जा सकता।

एसआईआर के विरोध में कर रहे थे प्रदर्शन

सीजेपी और कुछ विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग कर रही है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

नोट: जमानत के बाद रिहाई की वास्तविक स्थिति और आदेश की शर्तों की पुष्टि अदालत के लिखित आदेश से की जानी चाहिए।

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