अस्थिर रुपये को लेकर RBI गवर्नर की प्रतिक्रिया, बोले- मुद्रा फिलहाल कमजोर, स्थिरता के लिए हस्तक्षेप जारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को रुपये में जारी कमजोरी को लेकर बयान दिया। उन्होंने माना कि भारतीय मुद्रा फिलहाल कमजोर स्तर पर है, लेकिन साथ ही भरोसा दिलाया कि केंद्रीय बैंक रुपये में व्यवस्थित उतार-चढ़ाव बनाए रखने और उसकी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

गवर्नर मल्होत्रा ने RBI मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्रीय बैंक का उद्देश्य रुपये को किसी निश्चित स्तर पर बनाए रखना नहीं, बल्कि बाजार में अत्यधिक और अव्यवस्थित उतार-चढ़ाव को रोकना है। उन्होंने कहा कि RBI रुपये की व्यवस्थित आवाजाही का समर्थन करेगा और मुद्रा को उसके उचित मूल्य के अनुरूप रहने में मदद करेगा।

डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव

रुपये पर हाल के दिनों में लगातार दबाव देखने को मिला है। बुधवार को भारतीय मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.96 रुपये प्रति डॉलर का सर्वकालिक निचला स्तर छुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपये पर दबाव बढ़ा है। संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ता है। ऊंचे तेल आयात बिल से डॉलर की मांग बढ़ने और रुपये पर दबाव पड़ने की स्थिति बन सकती है।

बाजार के व्यवहार पर RBI गवर्नर ने क्या कहा?

संजय मल्होत्रा ने कहा कि बाजार अल्पावधि में कई बार अतार्किक तरीके से व्यवहार कर सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में बाजार मुद्रा का उचित मूल्य निर्धारित करने में सक्षम होते हैं।

उन्होंने कहा कि विभिन्न अनुमानों के अनुसार रुपया फिलहाल अपने उचित मूल्य से कमजोर स्तर पर हो सकता है। वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (REER) समेत अलग-अलग आकलनों का हवाला देते हुए उन्होंने रुपये के मूल्यांकन पर यह बात कही।

रुपये को स्थिर करने के लिए RBI के कदम

रुपये में कमजोरी से निपटने के लिए RBI ने हाल के समय में कई उपाय किए हैं। केंद्रीय बैंक ने प्रवासी भारतीय जमा और बॉन्ड जारी करने से जुड़ी रियायती स्वैप सुविधा समेत कुछ कदम उठाए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों ने FCNR(B) जमा सुविधा के तहत करीब 13.3 अरब डॉलर जुटाए हैं। इससे कुछ समय के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिली, लेकिन इसके बाद भारतीय मुद्रा एक बार फिर दबाव में आ गई।

सही मूल्य और स्थिरता पर जोर

RBI गवर्नर ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक रुपये के किसी एक निश्चित स्तर को बचाने के बजाय उसकी व्यवस्थित चाल और बाजार में स्थिरता पर ध्यान देगा। उनका कहना है कि जरूरत के अनुसार केंद्रीय बैंक बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाता रहेगा।

रुपये की कमजोरी के बीच RBI के इस बयान को विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, रुपये की आगे की दिशा वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी के प्रवाह जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

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