अयोध्या में बदले सियासी-सामाजिक समीकरण? 2 सितंबर की बैठक से पहले चंपत राय की हलचल तेज

रामनगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 2 सितंबर को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले चंपत राय की बढ़ती सक्रियता चर्चा का विषय बन गई है। कभी बड़े आयोजनों में मुख्य अतिथि के रूप में नजर आने वाले चंपत राय अब मठ-मंदिरों के छोटे-बड़े धार्मिक कार्यक्रमों, जन्मदिन समारोहों और संतों के आयोजनों में लगातार पहुंच रहे हैं।
चंपत राय इन दिनों साधु-संतों से मुलाकात कर रहे हैं, उनका आशीर्वाद ले रहे हैं और पुराने संपर्कों को मजबूत करने में जुटे दिखाई दे रहे हैं। संत समाज के बीच उनकी लगातार मौजूदगी को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
दरअसल, 2 सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में महासचिव, प्रवक्ता, सीईओ समेत खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों को लेकर फैसला हो सकता है। ऐसे में बैठक से ठीक पहले चंपत राय की बढ़ी सक्रियता ने रामनगरी की सियासत और धार्मिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि चंपत राय केवल औपचारिक निमंत्रण वाले कार्यक्रमों में ही नहीं, बल्कि कई जगह संतों से व्यक्तिगत मुलाकात के लिए भी पहुंच रहे हैं। मठ-मंदिरों में उनकी मौजूदगी और संतों से लगातार संवाद के पीछे पुराने संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश के मायने निकाले जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चंपत राय एक बार फिर राम मंदिर ट्रस्ट में किसी अहम भूमिका के लिए अपनी जमीन मजबूत कर रहे हैं? हालांकि उनकी संभावित वापसी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।
फिलहाल, 2 सितंबर की बैठक से पहले चंपत राय की बढ़ती सक्रियता ने अयोध्या के राजनीतिक और धार्मिक माहौल को गर्म कर दिया है। अब सबकी निगाहें ट्रस्ट की उस बैठक पर टिकी हैं, जहां कई बड़े फैसले होने की संभावना जताई जा रही है।





