नेपाल-चीन आपदा में विदेशी पर्यटक भी फंसे: 1500 के करीब लोग लापता, मौतों का आंकड़ा 175

नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों देशों में भारी तबाही मचा दी है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और मलबे के बड़े हिस्से के ढहने के बाद आए फ्लैश फ्लड ने नेपाल और तिब्बत के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, दोनों क्षेत्रों में करीब 1,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक, अकेले नेपाल में 826 लोग लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भारत समेत दो दर्जन से अधिक देशों के लोग इस आपदा में लापता हैं। वहीं चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी सैकड़ों लोगों का अब तक पता नहीं चल सका है।

यह इलाका कैलाश मानसरोवर यात्रा और हिमालयी ट्रैकिंग के प्रमुख मार्गों में शामिल है। आपदा के समय बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु यहां मौजूद थे। अचानक आए पानी, कीचड़, चट्टानों और मलबे के तेज बहाव ने सड़कें, पुल, घर और कई अहम ढांचों को तबाह कर दिया।

नेपाल में सेना, पुलिस और आपदा राहत टीमें युद्धस्तर पर खोज अभियान चला रही हैं। हेलीकॉप्टरों के जरिए फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और सुरक्षित इलाकों में निकासी का काम जारी है। लेकिन टूटी सड़कें, खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों की कठिन परिस्थितियां बचाव अभियान में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे राहत और बचाव दल दूरदराज के प्रभावित इलाकों तक पहुंचेंगे, लापता और मृतकों के आंकड़ों में बदलाव हो सकता है। इस भीषण त्रासदी ने नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में एक बड़े मानवीय संकट की स्थिति पैदा कर दी है।

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