अमेरिका-ईरान में आर्थिक जंग तेज: इकोनॉमिक डी-डे पर तेहरान का पलटवार, तेल को लेकर कड़ा संदेश

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब आर्थिक मोर्चे पर भी निर्णायक दौर में पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक ताकत और उसकी प्रमुख वित्तीय जीवन-रेखाओं को निशाना बनाने के लिए बड़े अभियान का एलान किया है। वहीं, तेहरान ने पलटवार करते हुए चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका का आर्थिक युद्ध जारी रहा तो होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से तेल की एक भी बूंद का निर्यात नहीं होने दिया जाएगा।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ अपने अभियान के अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार देते हुए दावा किया कि यह किसी विरोधी देश के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला होगा। बेसेंट के अनुसार, अमेरिका का उद्देश्य ईरानी शासन को सहारा देने वाली आर्थिक जीवन-रेखाओं को पूरी तरह कमजोर करना है।

बेसेंट ने ईरान पर सुरक्षा गारंटी का इस्तेमाल दबाव और वसूली के हथियार के रूप में करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के दौर में अब ऐसी रणनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए अमेरिकी सरकार की सभी एजेंसियों और उपलब्ध अधिकारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

तेल निर्यात रोकने की चेतावनी

अमेरिका की इस घोषणा के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी कि अगर तेहरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध जारी रहा तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से तेल के पूरे निर्यात को रोक सकता है।

रेजाई ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को तेहरान युद्ध की कार्रवाई के तौर पर देखेगा। उनका कहना है कि आर्थिक दबाव बढ़ने की स्थिति में क्षेत्र से तेल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।

अमेरिकी प्रतिबंधों पर ईरान का तंज

इससे पहले ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ ने भी अमेरिका की नई आर्थिक पाबंदियों की धमकी पर तंज कसा था। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी उपायों के जरिए गहरे आर्थिक संकटों का समाधान नहीं निकाला जा सकता और अत्यधिक आर्थिक दबाव का असर उल्टा भी पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ रहे इस तनाव ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति रोकने की ईरानी चेतावनी ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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