धर्म-सद्भाव की मिसाल: सैय्यद-बाबा दरबार में सजी झांकी, अजमेर शरीफ से मंगाई गई चादर

अलवर के मोती डूंगरी स्थित सैय्यद बाबा दरबार में गुरुवार को 22वां वार्षिक उर्स धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई, जिसके बाद दिल्ली और जोधपुर से आए कव्वाल अपनी प्रस्तुति में भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

दरबार के बाहर राधा-कृष्ण, भोलेनाथ और सांई दरबार की भव्य झांकी सजाई गई, साथ ही सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया। बाबा की मजार को कोलकाता से मंगाए गए रजनीगंधा और मोगरा के फूलों से सजाया गया। विशेष सजावट के लिए मेरठ और यूपी से कारीगर बुलाए गए।

इस अवसर पर अजमेर शरीफ से मंगाई गई चादर को रहमान अली बादशाह बाबा और जुम्मे खां पठान बाबा को अर्पित किया गया। तड़के 5 बजे बाबा को पंचामृत से स्नान कराया गया और विशेष चादर और कन्नौज के इत्र की सुगंध अर्पित की गई।

सुबह 10 बजे से भंडारे की शुरुआत हुई और हजारों श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंचे। मोती डूंगरी दरबार अलवर में एकमात्र ऐसा स्थल है, जहां एक ही छत के नीचे हनुमान मंदिर और सैय्यद बाबा का दरबार स्थित है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है। पूरा परिसर रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा रहा था और भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ती रही।

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