मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर विरोध तेज, महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर जताया आक्रोश

शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मंगलवार को इलाके में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। बड़ी संख्या में महिलाओं और व्यापारियों ने सड़क पर उतरकर फैसले के खिलाफ नाराजगी जताई और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अदालत के फैसले के बाद अब हजारों परिवारों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार आश्वासन दिए गए, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना था कि अब कार्रवाई की जद में आने वाले भवनों में रहने और व्यापार करने वाले परिवारों का भविष्य अधर में लटक गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक समाधान निकालने की मांग की।
44 सील भवनों को ध्वस्त करने का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट मामले में पहले से सील किए गए 44 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन आवासीय भवनों का उपयोग नियमों के विपरीत पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। साथ ही अवैध निर्माणों को नियमित करने की मांग भी अदालत ने खारिज कर दी।
25 मीटर श्रेणी के भवनों को भी नहीं मिली राहत
फैसले के बाद प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि 25 मीटर से बड़े भवनों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी। वहीं, जिन भवनों का स्वीकृत मानचित्र नहीं है, उनके खिलाफ भी ड्रोन सर्वे के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि इस फैसले से बड़ी संख्या में परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अवैध निर्माण के मामलों में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता और नियमों के विपरीत बनाए गए भवनों को वैध घोषित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने साफ किया कि सभी अवैध निर्माणों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
व्यापारियों में मायूसी, भविष्य को लेकर चिंता
अदालत के फैसले के बाद सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में मायूसी का माहौल है। व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और निर्माण नियमों के अनुरूप बदलाव जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कई व्यापारियों ने इसे हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा मामला बताते हुए सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवास एवं विकास परिषद द्वारा आगे की कार्रवाई तेज किए जाने की संभावना है। वहीं प्रभावित व्यापारी और स्थानीय निवासी अब आगे की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।





