धुरंधर की कास्टिंग की तारीफ: अमित बोले- हर कलाकार ने किरदार को यादगार बनाया

फिल्म सितंबर 21 सिर्फ अल्जाइमर पर आधारित कहानी नहीं, बल्कि उन केयरगिवर्स की भावनात्मक यात्रा को भी दिखाती है, जो अपनों की देखभाल करते-करते भीतर से टूटने लगते हैं। डायरेक्टर करेन क्षिति सुवर्णा और को-प्रोड्यूसर प्रीति अली ने इस संवेदनशील विषय को वास्तविक अनुभवों से जोड़कर पर्दे पर उतारा है।

दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रवीण एस. सिसोदिया, प्रियंका उपेंद्र और अमित बहल ने कहा कि फिल्म सिर्फ मरीजों का नहीं, बल्कि उनके परिवार और देखभाल करने वालों के दर्द को भी सामने लाती है। करेन क्षिति सुवर्णा ने बताया कि लेखक राज शेखर की निजी जिंदगी और अल्जाइमर केयर सेंटर के अनुभवों ने फिल्म की कहानी को जन्म दिया।

अमित बहल ने कहा कि अल्जाइमर को लोग अक्सर सामान्य भूलने की बीमारी समझ लेते हैं, जबकि यह गंभीर मानसिक बीमारी है। उन्होंने बताया कि फिल्म में बीमारी के मेडिकल पहलुओं और मरीजों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को भी विस्तार से दिखाया गया है।

इंटरव्यू के दौरान फिल्म धुरंधर की सफलता और उसकी कास्टिंग पर भी चर्चा हुई। अमित बहल ने कहा कि फिल्म की सफलता पूरी तरह डिजर्व करती है और उसकी कास्टिंग इतनी परफेक्ट थी कि हर कलाकार अपने किरदार में पूरी तरह फिट नजर आया। वहीं प्रवीण सिसोदिया ने कहा कि जब किसी फिल्म की कास्टिंग सही होती है, तो उसके किरदार मुगल-ए-आजम की तरह लंबे समय तक याद रखे जाते हैं।

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