याचिका खारिज: कोर्ट ने कहा- सिर्फ राज्य का निवासी होना पर्याप्त नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल उत्तर प्रदेश का निवासी होना किसी व्यक्ति को दूसरे राज्य से जुड़े मामलों में यहां सुनवाई का अधिकार नहीं देता।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने अलीगढ़ निवासी सचिन कुमार व अन्य की याचिका पर दिया।

याचिका में नई दिल्ली स्थित सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की प्रधान पीठ के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें याचियों की सेवा समाप्ति को सही ठहराया गया था।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से क्षेत्राधिकार को लेकर आपत्ति उठाई गई, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए कहा कि किसी न्यायाधिकरण के आदेश की समीक्षा उसी हाईकोर्ट द्वारा की जाएगी, जिसके क्षेत्राधिकार में वह न्यायाधिकरण स्थित है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 226(2) के तहत केवल निवास के आधार पर अधिकार क्षेत्र तय नहीं किया जा सकता।

हालांकि, अदालत ने याचियों को संबंधित और सक्षम न्यायालय में याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अलग-अलग राज्यों के निवासी एक ही आदेश को विभिन्न हाईकोर्ट में चुनौती देंगे, तो इससे परस्पर विरोधी फैसलों की स्थिति पैदा हो सकती है।

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