KGMU धर्मांतरण केस में नया मोड़: कथित धर्मांतरण और धमकी के मामले में प्रशासन की भूमिका पर सवाल, STF जुटा जांच में

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और महिला कर्मचारियों को धमकाने के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में एक दर्जन से अधिक डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। जांच में शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने और पीड़ितों की आवाज दबाने के आरोप भी उठे हैं। अब इस मामले में संस्थान के प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
छह-सात महीने की जांच में जुटाए गए साक्ष्य
जानकारी के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर में डॉ. रमीज के खिलाफ धर्मांतरण के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद शासन ने प्रकरण की जांच STF को सौंप दी थी। STF ने करीब छह से सात महीने तक जांच की। इस दौरान सर्विलांस के जरिए जानकारियां जुटाई गईं, पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की गई।
जांच के बाद शासन को भेजी गई रिपोर्ट में कई डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम या भूमिका का जिक्र है, उनके खिलाफ आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
पीड़ितों ने लगाए धमकी और प्रताड़ना के आरोप
जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, कुछ पीड़ितों ने कथित तौर पर धर्मांतरण के दबाव, धमकी और उत्पीड़न की शिकायतें की थीं। आरोप है कि कुछ मामलों में शिकायत करने वाली महिलाओं को डराया गया और शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
एक मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। जांच में ऐसे मामलों का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। इन आरोपों ने संस्थान में शिकायत निवारण की व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
KGMU प्रशासन की भूमिका की भी होगी जांच
मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि संस्थान में लंबे समय से ऐसी गतिविधियां चल रही थीं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आरोप है कि कुछ शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए।
KGMU के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह के मुताबिक, छह नवंबर को कार्यपरिषद की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में STF की रिपोर्ट रखी जाएगी। रिपोर्ट में शामिल डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ अलग-अलग अनुशासनात्मक जांच समितियां गठित करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इसके बाद आगे की जांच और कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
एरा मेडिकल कॉलेज से भी जुड़े तार
STF की रिपोर्ट में कथित धर्मांतरण प्रकरण के तार लखनऊ स्थित एरा मेडिकल कॉलेज से भी जुड़ने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान के कुछ डॉक्टरों के निजी मेडिकल कॉलेज में आर्थिक निवेश का भी उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा, एरा मेडिकल कॉलेज के कुलपति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति पहले KGMU के मेडिसिन विभाग में विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। हालांकि, इन तथ्यों के आधार पर किसी की संलिप्तता को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
जांच समितियों की निष्पक्षता पर भी सवाल
रिपोर्ट में KGMU में शिकायतों की जांच के लिए समितियां गठित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि समिति के सदस्यों के नाम तय करने की प्रक्रिया में विभागीय स्तर पर प्रभाव पड़ सकता था, जिससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका थी।
STF की रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब छह नवंबर को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें रिपोर्ट पर चर्चा के साथ अनुशासनात्मक जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई KGMU प्रशासन की बैठक, प्रस्तावित विभागीय जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।





