KGMU केस में एसटीएफ की जांच तेज: जाकिर नाईक से जुड़े दो डॉक्टरों के संपर्क की पड़ताल, कई पहलुओं की जांच जारी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए कथित धर्मांतरण प्रकरण की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दो डॉक्टर कथित तौर पर भगोड़े इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक के सीधे संपर्क में थे। आरोप है कि दोनों डॉक्टर केजीएमयू और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) में उसकी विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। जांच में सोशल मीडिया ग्रुप के जरिए डॉक्टरों, कर्मचारियों और नए विद्यार्थियों को जोड़ने के प्रयासों का भी जिक्र किया गया है। मामले में कश्मीर कनेक्शन और धार्मिक तकरीरों में बाहरी लोगों की मौजूदगी की भी पड़ताल की जा रही है।
दो डॉक्टरों की भूमिका पर एसटीएफ की नजर
एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में दो डॉक्टरों की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये डॉक्टर कथित तौर पर जाकिर नाईक के संपर्क में थे और उसकी विचारधारा से जुड़ी सामग्री दूसरे लोगों तक पहुंचा रहे थे। आरोप है कि केजीएमयू से लेकर पीजीआई तक इस तरह की गतिविधियों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को अपने संपर्क में लाने की कोशिश की जा रही थी।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में कई लोग शामिल हो चुके थे। एसटीएफ अब इन लोगों के आपसी संपर्क, गतिविधियों और संस्थानों में उनकी भूमिका की जानकारी जुटा रही है।
सोशल मीडिया ग्रुप बनाकर साझा की जाती थी सामग्री
जांच में सोशल मीडिया को कथित नेटवर्क का प्रमुख माध्यम बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग सोशल मीडिया ग्रुप बनाए गए थे, जिनमें जाकिर नाईक के भाषण और उससे जुड़ी सामग्री साझा की जाती थी। आरोप है कि इन ग्रुपों के जरिए डॉक्टरों और कर्मचारियों तक सामग्री पहुंचाई जाती थी।
जांच रिपोर्ट में कुछ पोस्ट को भड़काऊ बताते हुए उनका भी उल्लेख किया गया है। इनमें गैर-मुस्लिम समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री साझा किए जाने का आरोप है। एसटीएफ इन ग्रुपों के सदस्यों, उनके एडमिन और सामग्री साझा करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
नए छात्र-छात्राओं को ग्रुप से जोड़ने का आरोप
एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि केजीएमयू में नए दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को इन सोशल मीडिया ग्रुपों से जोड़ने की कोशिश की जाती थी। सूत्रों के अनुसार, खासतौर पर मुस्लिम विद्यार्थियों को संपर्क में लाने का प्रयास किया जाता था।
आरोप है कि शुरुआत में विद्यार्थियों को सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से जोड़ा जाता था। बाद में कुछ विद्यार्थी संबंधित डॉक्टरों के सीधे संपर्क में आने लगते थे। जांच में यह भी दावा किया गया है कि विद्यार्थियों को कथित तौर पर विचारधारा का प्रचार करने और दूसरे लोगों को समूह से जोड़ने की जिम्मेदारी दी जाती थी।
एसटीएफ इस पूरे मामले में यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कितने विद्यार्थी और कर्मचारी इन ग्रुपों से जुड़े थे और उनकी गतिविधियां किस स्तर तक संचालित हो रही थीं।
एक डॉक्टर का कश्मीर कनेक्शन, मौलानाओं की मौजूदगी की भी जांच
इस मामले में कश्मीर कनेक्शन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दायरे में शामिल दो डॉक्टरों में से एक कश्मीर की रहने वाली हैं। एसटीएफ ने उनकी भूमिका और संबंधित लोगों से उनके संपर्कों की विस्तार से पड़ताल की है।
जांच में केजीएमयू में कथित तौर पर आयोजित होने वाली तकरीरों का भी उल्लेख किया गया है। बताया जा रहा है कि इन कार्यक्रमों में कश्मीर से आने वाले कुछ मौलाना और अन्य लोग भी शामिल होते थे। अब जांच एजेंसी इन लोगों की पहचान, उनके संस्थान में आने के उद्देश्य और संबंधित डॉक्टरों के साथ उनके संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।
एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि इन कार्यक्रमों का आयोजन किसके माध्यम से होता था और इनमें किन लोगों की भूमिका रहती थी।
केजीएमयू और पीजीआई से आगे बढ़ी जांच
धर्मांतरण प्रकरण की जांच का दायरा अब केजीएमयू और पीजीआई से आगे बढ़ गया है। एसटीएफ ने लखनऊ के इंटीग्रल विश्वविद्यालय और आगरा के एक मेडिकल कॉलेज समेत अन्य शिक्षण संस्थानों से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल शुरू की है।
इन संस्थानों में कार्यरत कुछ डॉक्टरों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित नेटवर्क की गतिविधियां किन-किन संस्थानों तक फैली हुई थीं और अलग-अलग जगहों पर जुड़े लोगों के बीच किस तरह का संपर्क था।
डॉक्टरों और कर्मचारियों के संपर्कों की खंगाली जा रही जानकारी
जांच के दौरान एसटीएफ सोशल मीडिया गतिविधियों, डॉक्टरों के आपसी संपर्कों, विद्यार्थियों को जोड़ने के कथित प्रयासों और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। एजेंसी संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
इस प्रकरण में पहले भी केजीएमयू के डॉक्टरों और कर्मचारियों से जुड़े कई आरोप सामने आ चुके हैं। अब जाकिर नाईक से कथित संपर्क और दूसरे मेडिकल संस्थानों तक जांच पहुंचने के बाद मामले का दायरा और बढ़ गया है।
फिलहाल एसटीएफ की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट में जिन लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है, उनके संबंध में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।





