राज्य के अधिकार छीनना आपका काम नहीं,तमिलनाडु शराब घोटाले पर ईडी को सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार

तमिलनाडु में TASMAC शराब घोटाले की जांच को लेकर चर्चा तेज है। मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या केंद्र की एजेंसी राज्य सरकार के अधिकारों में दखल दे रही है, और क्या यह संघीय ढांचे के खिलाफ नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने ईडी से पूछा कि राज्य सरकार ने पहले ही एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी, तो ईडी बीच में क्यों आ रही है। न्यायालय ने कहा कि पिछले छह साल में ईडी की कई जांचें देखी हैं, लेकिन अब इस मामले में ज्यादा टिप्पणी नहीं करेंगे।

राज्य सरकार की ओर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि ईडी द्वारा TASMAC ऑफिस में छापेमारी के दौरान कर्मचारियों के मोबाइल और कंप्यूटर जब्त किए गए, महिला कर्मचारियों को घंटों रोका गया, जो निजता का उल्लंघन है। सिब्बल ने पीएमएलए की धारा 66(2) का हवाला देते हुए कहा कि अगर ईडी को अन्य अपराधों के सबूत मिलते हैं, तो उन्हें संबंधित एजेंसी को सौंपना चाहिए।

ईडी की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि राज्य पुलिस ने 47 केस दर्ज किए हैं, लेकिन भ्रष्टाचार जारी है। उन्होंने अवैध कैश, फर्जी दस्तावेज और ठेके में गड़बड़ी का हवाला दिया।

मुख्य न्यायाधीश ने फिर सवाल किया कि सबूत मिलने के बाद उन्हें राज्य को क्यों नहीं सौंपा गया। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि TASMAC शिकायतकर्ता है, आरोपी नहीं, इसलिए ईडी के पास पीएमएलए के तहत जांच का कोई अधिकार नहीं बनता।

यह मामला तब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जब डीएमके सरकार और TASMAC ने मद्रास हाईकोर्ट के 23 अप्रैल के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें ईडी को जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी।

Related Articles

Back to top button