जमानत अधिकार, जेल अपवाद, दिल्ली दंगा केस में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Supreme Court of India ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में Umar Khalid को जमानत देने से इनकार करने वाले अपने पुराने फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी भी आरोपी को बेल देना नियम होना चाहिए, जबकि जेल अपवाद है। कोर्ट ने यह टिप्पणी सोमवार को सैयद इफ्तिखार अंद्राबी से जुड़े नार्को-टेररिज्म मामले की सुनवाई के दौरान की।
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने सुनवाई के दौरान 2021 के केए नजीब मामले का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में UAPA जैसे मामलों में भी अदालतें जमानत दे सकती हैं। बेंच ने माना कि उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज करते समय इस फैसले पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बड़ी बेंच के फैसलों का पालन छोटी बेंचों को करना ही पड़ता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कई बार छोटी बेंचें सीधे विरोध नहीं करतीं, लेकिन फैसलों के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश होती है।
Umar Khalid सितंबर 2020 से जेल में हैं और उन पर 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं। फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उमर खालिद अब तक जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई बार याचिका दायर कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है।





