यूपी में शिक्षकों के दस्तावेजों की होगी पड़ताल, एसटीएफ और बेसिक शिक्षा विभाग मिलकर करेंगे सत्यापन

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों के शैक्षिक और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन अब स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और बेसिक शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से करेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद विभाग ने सत्यापन प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत सभी जिलों में शिक्षकों के दस्तावेज एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाएंगे।

शिक्षकों को जमा करने होंगे शैक्षिक प्रमाणपत्र

बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, बीएड, बीटीसी, डीएलएड, बीएलएड और टीईटी-सीटीईटी से संबंधित प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। इसके अलावा नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज भी देने होंगे।

शिक्षकों को नोटरी से सत्यापित शपथपत्र भी जमा करना अनिवार्य होगा। इसमें विभाग में कार्यरत या सेवानिवृत्त निकट संबंधियों का पूरा विवरण देना होगा। यदि शिक्षक का कोई निकट संबंधी विभाग में कार्यरत या सेवानिवृत्त नहीं है, तो इसकी जानकारी भी शपथपत्र में देनी होगी।

एसटीएफ के रेंज कार्यालय भेजे जाएंगे दस्तावेज

बेसिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के माध्यम से जल्द से जल्द दस्तावेज एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों के अभिलेख निर्धारित एक्सेल शीट में दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद बीएसए कार्यालय से संबंधित एसटीएफ रेंज कार्यालयों को भेजे जाएंगे।

एसटीएफ के रेंज अधिकारी दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्त का सहयोग भी लिया जाएगा। जांच के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग सभी स्तरों पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगा।

इस प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने के लिए जिला स्तर पर बीएसए, मंडल स्तर पर संबंधित सहायक शिक्षा अधिकारी और प्रदेश स्तर पर सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

एक प्रमाणपत्र पर 10 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला

दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग में एक ही प्रमाणपत्र के आधार पर 10 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आया था। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच करने के निर्देश दिए थे।

इससे पहले भी प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक की नौकरी पाने के मामले सामने आते रहे हैं। जिला स्तर पर ऐसे मामलों में कार्रवाई भी की गई है। हालांकि, कई बार जानकारी जुटाने के बावजूद फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की कुल संख्या का स्पष्ट ब्योरा एकत्र नहीं हो सका।

अब एसटीएफ और बेसिक शिक्षा विभाग की संयुक्त सत्यापन प्रक्रिया से शिक्षकों के शैक्षिक एवं नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इससे फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर हुई नियुक्तियों की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

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