फ्रेंच ओपन फाइनल में सिंधू को झटका: एन से यंग के सामने फिर बेबस दिखीं भारतीय स्टार, खिताब से चूकीं

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू का फ्रेंच ओपन सुपर 750 टूर्नामेंट में खिताब जीतने का सपना टूट गया। रविवार को खेले गए महिला एकल के फाइनल में सिंधू को दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर-1 खिलाड़ी एन से यंग के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। सिंधू ने पहला गेम जीतकर शानदार शुरुआत की, लेकिन बाद के दोनों गेम गंवाकर उन्हें उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा।
फाइनल मुकाबले में सिंधू को 21-16, 11-21, 12-21 से शिकस्त मिली। इस जीत के साथ एन से यंग ने भारतीय खिलाड़ी के खिलाफ अपना जीत का रिकॉर्ड 11-0 कर लिया।
पहला गेम जीतकर बनाई बढ़त, फिर पलट गया मुकाबला
पीवी सिंधू ने फाइनल में आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और पहला गेम 21-16 से अपने नाम किया। हालांकि, दूसरे गेम में एन से यंग ने जोरदार वापसी की। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने सिंधू को 21-11 से हराकर मुकाबला बराबरी पर ला दिया।
निर्णायक गेम में भी एन से यंग का दबदबा कायम रहा। उन्होंने 21-12 से तीसरा गेम जीतकर फ्रेंच ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया। सिंधू ने मुकाबले में अच्छी शुरुआत की, लेकिन वह अपनी बढ़त को जीत में तब्दील नहीं कर सकीं।
1998 के बाद इतिहास रचने से चूकीं सिंधू
इस हार के साथ ही सिंधू फ्रेंच ओपन महिला एकल का खिताब जीतने वाली 1998 के बाद पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने से चूक गईं। भारत की अपर्णा पोपट ने 1998 में यह खिताब जीता था। इसके बाद से किसी भारतीय महिला खिलाड़ी को इस टूर्नामेंट के महिला एकल वर्ग में खिताबी सफलता नहीं मिली है।
सिंधू पहली बार फ्रेंच ओपन के महिला एकल फाइनल में पहुंची थीं। ऐसे में उनके पास भारतीय बैडमिंटन इतिहास में नया अध्याय जोड़ने का मौका था, लेकिन एन से यंग ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
एन से यंग के खिलाफ लगातार 11वीं हार
एन से यंग के खिलाफ सिंधू का संघर्ष फाइनल में भी जारी रहा। इस जीत के बाद दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी का भारतीय शटलर के खिलाफ जीत-हार का रिकॉर्ड 11-0 हो गया है। यानी सिंधू अब तक एन से यंग को किसी भी मुकाबले में नहीं हरा सकी हैं।
एन से यंग ने वर्ष 2026 में भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। फाइनल से पहले उनका इस साल जीत-हार का रिकॉर्ड 65-1 बताया गया था। फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने के बाद उनकी लगातार जीत का सिलसिला 50 मैचों तक पहुंच गया।
जापान ओपन के बाद साल का दूसरा बड़ा फाइनल
पीवी सिंधू के लिए यह साल का दूसरा सुपर 750 फाइनल था। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन का खिताब जीता था। उस फाइनल में सिंधू ने जापान की तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को हराया था।
जापान ओपन की जीत दिसंबर 2024 के बाद सिंधू का पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब थी। इसी टूर्नामेंट में उन्होंने अपने करियर का पहला सुपर 750 खिताब भी हासिल किया था। फ्रेंच ओपन में उपविजेता रहने के बावजूद सिंधू के अभियान को उनके लिए सकारात्मक माना जा सकता है।
सेमीफाइनल में जापानी खिलाड़ी को दी थी मात
विश्व रैंकिंग में 11वें स्थान पर काबिज सिंधू ने सेमीफाइनल में जापान की हिना अकेची को कड़े मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। उन्होंने यह मैच 21-10, 20-22, 21-16 से जीता था।
टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में भी सिंधू को थाईलैंड की सुपानिदा कातेथोंग से कड़ी चुनौती मिली थी। इसके बाद उन्होंने जापान की रिको गुनजी और चीनी ताइपे की चिउ पिन-चियान को सीधे गेमों में हराकर अगले दौर में प्रवेश किया।
फाइनल में हार के बावजूद सिंधू ने टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन किया। हालांकि, फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने और भारतीय बैडमिंटन में नया इतिहास रचने के लिए उन्हें अभी और इंतजार करना होगा।





