राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: FIR में देरी से सवाल, चंपत राय की भूमिका को लेकर चर्चा તેજ

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी के मामले में दाखिल चार्जशीट के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया है और चार्जशीट में उनका बयान गवाह के तौर पर दर्ज है।

चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून की रात गणना कर्मी आनंद कुमार चौधरी ने चंपत राय के मोबाइल पर चोरी से जुड़ा वीडियो और संदेश भेजा था। संदेश में करीब 2.25 लाख रुपये की रकम चोरी होने की जानकारी दी गई थी। वीडियो में नोटों की गड्डियां भी दिखाई गई थीं।

इसके अगले दिन 5 जून को चंपत राय को चोरी से जुड़े वीडियो दिखाए गए। चार्जशीट के अनुसार, वीडियो में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान नोटों की गड्डियों से रकम निकालने की तस्वीरें सामने आई थीं। इसके बावजूद मामले में 25 जून को FIR दर्ज हुई, यानी शुरुआती सूचना मिलने के करीब तीन सप्ताह बाद।

चार्जशीट में क्या कहा गया?

चार्जशीट में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और बरामदगी को मामले से जुड़े अहम साक्ष्य बताया है। पुलिस के मुताबिक, आठ आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।

हालांकि, चार्जशीट में चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया गया है। उनके खिलाफ चोरी में सहयोग करने, किसी आरोपी को संरक्षण देने या जांच प्रभावित करने का कोई निष्कर्ष भी दर्ज नहीं है।

FIR में देरी पर सवाल

मामले में सबसे अहम सवाल 4 जून को चोरी की सूचना मिलने से लेकर 25 जून को FIR दर्ज होने के बीच के अंतर को लेकर उठ रहे हैं। चार्जशीट में दर्ज घटनाक्रम के आधार पर यह सवाल है कि सूचना मिलने के बाद पुलिस को कब जानकारी दी गई और FIR दर्ज होने में करीब 21 दिन क्यों लगे।

इस मामले में आगे की कार्रवाई और अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि चोरी की सूचना मिलने के बाद ट्रस्ट स्तर पर क्या कदम उठाए गए थे।

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