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एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय वुशु टीम से बाहर की गईं 18 वर्षीय खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी के मामले में नया मोड़ आ गया है। खेल मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद दिव्यांशी ने अब राष्ट्रीय महासंघ के फैसले को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान चोट से उबरने और भविष्य की प्रतियोगिताओं की तैयारी पर है।

22 अगस्त को जारी खेल मंत्रालय की सूची में दिव्यांशी को सात सदस्यीय भारतीय वुशु टीम में शामिल किया गया था। हालांकि, बाद में बाएं घुटने की एसीएल चोट का हवाला देते हुए उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह दो बार की एशियन गेम्स पदक विजेता रोशिबिना देवी को महिला 60 किग्रा सांडा वर्ग में शामिल किया गया।

चयन प्रक्रिया पर उठाए थे सवाल

टीम से बाहर किए जाने के बाद दिव्यांशी ने वीडियो जारी कर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि डॉक्टरों ने उन्हें खेलने की अनुमति दी थी। इस दौरान उन्होंने बेहद भावुक होकर आत्महत्या की बात भी कही थी। वहीं, वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि दिव्यांशी को एसीएल चोट के कारण प्रतिस्पर्धी गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी गई थी।

अब दिव्यांशी ने कहा है कि महासंघ और खेल मंत्री ने उन्हें समझाया कि चोट से पूरी तरह उबरना उनके लंबे खेल करियर के लिए जरूरी है। उन्होंने महासंघ और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की ओर से सहयोग मिलने की बात भी कही है।

रोशिबिना पर लगाए आरोप

हालांकि, महासंघ के फैसले को स्वीकार करने के बावजूद दिव्यांशी ने रोशिबिना देवी को लेकर अपने आरोप वापस नहीं लिए हैं। उनका आरोप है कि रोशिबिना ने उन्हें और उनके परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया।

दिव्यांशी के अनुसार, यह कथित परेशानी जून से जारी है। हालांकि, रोशिबिना पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अब रोशिबिना देवी महिला 60 किग्रा सांडा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी, जबकि दिव्यांशी ने अपनी चोट से उबरकर भविष्य की प्रतियोगिताओं में वापसी को लक्ष्य बनाया है।

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