प्रदूषण मुक्त यूपी की दिशा में बड़ा कदम: लखनऊ में कल मंथन, पद्मश्री उमाशंकर पांडेय रखेंगे विचार

निर्मल गंगा और प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को लेकर मंगलवार को राजधानी लखनऊ में एक महत्वपूर्ण परिचर्चा आयोजित की जाएगी। अमर उजाला की ओर से उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण), नमामि गंगे और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में गंगा और दूसरी नदियों के संरक्षण, जल बचाने और प्रदूषण रोकने के उपायों पर मंथन होगा।
कार्यक्रम गोमतीनगर स्थित ताज महल होटल में सुबह 10 बजे शुरू होगा। इसमें वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण सक्सेना, बुंदेलखंड के जखनी मॉडल के प्रणेता पद्मश्री उमाशंकर पांडेय, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ध्रुवसेन सिंह, पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक कुमार सिंह समेत कई विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल होंगे।
गंगा की अविरलता और स्वच्छता पर होगी चर्चा
‘निर्मल गंगा, प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश’ विषय पर होने वाली परिचर्चा में गंगा की अविरलता बनाए रखने, नदियों की स्वच्छता, जलस्रोतों के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
इसके साथ ही जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और नदियों को स्वच्छ एवं जीवंत बनाने के लिए प्रभावी उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
जल संरक्षण के जखनी मॉडल पर भी होगी चर्चा
कार्यक्रम में पद्मश्री उमाशंकर पांडेय अपने ‘खेत पर मेड़, मेड़ पर पेड़’ के मंत्र के साथ बुंदेलखंड में विकसित किए गए जखनी मॉडल के अनुभव साझा करेंगे। उनके प्रयासों के बाद जखनी को देश का पहला ‘जल ग्राम’ घोषित किया गया था।
जखनी मॉडल से जुड़े प्रयासों को बाद में अटल भूजल योजना के व्यापक अभियान से भी जोड़ा गया। योजना के तहत हजारों ग्राम पंचायतों में भूजल प्रबंधन और जल संरक्षण को बढ़ावा दिया गया।
विद्यार्थियों में भी बढ़ाई गई जल संरक्षण की जागरूकता
जल संरक्षण से जुड़े अभियानों के तहत पानी की पाठशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को भी जल बचाने और भूजल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया है।
परिचर्चा में इस बात पर जोर रहेगा कि जल संरक्षण और नदी संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखते हुए इसमें आम लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जलस्रोतों के संरक्षण, प्रदूषण पर नियंत्रण और जागरूकता अभियान को मजबूत करने की जरूरत पर भी विचार होगा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ और अधिकारी उत्तर प्रदेश में नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने तथा जल संरक्षण के प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए संभावित उपायों पर अपने विचार रखेंगे।





