यूक्रेन पर रूस का भीषण हमला: रिहाइशी इलाकों में दहशत, गोदामों पर भी बरसी मिसाइलें

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग अब सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गई है। अब दोनों देश एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। गुरुवार सुबह रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव समेत नौ शहरों पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़े पैमाने पर हमला किया। इस हमले में रिहाइशी इलाकों के साथ-साथ कई निजी कंपनियों के गोदाम, बिजली ढांचा, अनाज निर्यात से जुड़े ठिकाने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क प्रभावित हुए।
बताया जा रहा है कि रूस ने इस बार यूक्रेन की आर्थिक गतिविधियों को सीधा निशाना बनाने की रणनीति अपनाई। रूसी हमलों में तीन बड़े डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर प्रभावित हुए। खिलौनों की एक बड़ी स्टोर चेन और चॉकलेट कंपनी के विशाल गोदामों को नुकसान पहुंचा, जबकि एक इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर का डिपो भी क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा ओडेसा के बंदरगाह क्षेत्र में लंबे समय तक चले हमले में एक अहम अनाज गोदाम को नुकसान पहुंचा, जो यूक्रेन के अनाज निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
रूस के हमलों का असर यूक्रेन के ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर भी पड़ा। खेरसॉन क्षेत्र में एक प्रमुख संयंत्र के जनरेटर नष्ट होने के बाद नाफ्तोगाज को अपना प्लांट बंद करना पड़ा। रेलवे नेटवर्क भी प्रभावित हुआ और कई ट्रेनें 17 घंटे से ज्यादा की देरी से चलीं। इन हमलों में ज़ापोरिज़िया में एक 78 वर्षीय महिला और खार्किव में एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए गए हैं।
उधर, यूक्रेन ने भी रूस के आर्थिक हितों पर पलटवार तेज कर दिया है। यूक्रेनी सेना रूस के भीतर लंबी दूरी के ड्रोन हमले कर रही है। इससे पहले रूस की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी वाइल्डबेरीज के गोदामों को निशाना बनाया गया था और अब रूस की दूसरी सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर कंपनी ओजोन के उफा स्थित लॉजिस्टिक्स सेंटर पर भी हमला किया गया है। ऑरेनबर्ग स्थित एक अन्य सुविधा को भी खतरे के चलते खाली कराना पड़ा।
रूस का दावा है कि उसकी हवाई सुरक्षा प्रणालियों ने यूक्रेन के 267 ड्रोन मार गिराए हैं। हालांकि, लगातार हो रहे इन हमलों से साफ है कि रूस और यूक्रेन के बीच जंग अब एक नए और खतरनाक दौर में पहुंच चुकी है, जहां सिर्फ सैनिक और सैन्य ठिकाने ही नहीं बल्कि आम नागरिक, रिहाइशी इलाके, व्यापारिक कंपनियां, गोदाम, बिजली संयंत्र और आर्थिक ढांचा भी निशाने पर हैं।
इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने यूरोपीय देशों से अतिरिक्त अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल प्रणालियां और हवाई सुरक्षा सहायता देने की मांग की है। यूक्रेन का कहना है कि लगातार हो रहे रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला करने के लिए उसके पास एयर डिफेंस मिसाइलों की कमी है।
मोल्दोवा के हवाई क्षेत्र में पांच अज्ञात ड्रोन घुसने की खबर ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरे यूरोप की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका बढ़ती जा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देशों के बीच आर्थिक ठिकानों पर हमलों का यह सिलसिला और तेज होगा, या फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव इस जंग को रोकने में कोई भूमिका निभा पाएगा। लेकिन मौजूदा हालात यही संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में रूस और यूक्रेन के बीच यह संघर्ष और भी खतरनाक रूप ले सकता है।





