प्रदर्शन स्थल पर दिल्ली हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: जंतर-मंतर बंद क्यों नहीं करते? केंद्र सरकार से पूछा सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों को लेकर केंद्र सरकार से तीखा सवाल किया है। अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि लगातार प्रदर्शन से शहर की व्यवस्था प्रभावित हो रही है तो जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद क्यों नहीं किया जाता। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकार अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में पूरे शहर को बंधक नहीं बनाया जा सकता।
मामले की सुनवाई अखिल भारतीय दलित ईसाई अधिकार संरक्षण समिति की याचिका पर हुई। याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन में अधिकतम 75 लोग शामिल होंगे और जुलाई से अनुमति के लिए दिया गया आवेदन लंबित है, जिस पर दिल्ली पुलिस ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमित महाजन ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा से कहा, “आप जंतर-मंतर को बंद क्यों नहीं कर देते? शहर के बीचों-बीच इस तरह की गतिविधियों से आम लोगों को परेशानी होती है। शहर को अनावश्यक रूप से बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए।” अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे आम नागरिकों का जीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए।
एएसजी चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने या नहीं रखने का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में फिलहाल धारा 144 लागू है और स्वतंत्रता दिवस नजदीक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है। उन्होंने आशंका जताई कि “75 लोगों का प्रदर्शन देखते-देखते 75 हजार लोगों की भीड़ में बदल सकता है,” इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
याचिकाकर्ता ने अदालत में शाहीन बाग मामले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को पहले ही मान्यता दे चुका है। इस पर न्यायमूर्ति महाजन ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरे शहर की सामान्य व्यवस्था बाधित हो। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के लंबित आवेदन पर 8 अगस्त तक निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।





