E20 ईंधन को लेकर सरकार ने दूर की शंकाएं, शुद्ध पेट्रोल और E10 पर दिया स्पष्ट जवाब

E20 ईंधन को लेकर उठ रहे सवालों पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। मंत्रालय ने कहा कि देशभर में शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 को एक साथ उपलब्ध कराना भारत के विशाल ईंधन वितरण नेटवर्क में परिचालन और लॉजिस्टिक रूप से संभव नहीं है।

मंत्रालय के अनुसार, भारत का E20 ईंधन की ओर संक्रमण ऑटोमोबाइल कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद शुरू किया गया है। यह फैसला वाहन अनुकूलता, इंजन प्रदर्शन, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता से जुड़े तकनीकी आकलनों के आधार पर लिया गया है।

सरकार ने बताया कि देश में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप रिफाइनरियों, डिपो, टर्मिनलों और पाइपलाइनों के बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं। ऐसे में अलग-अलग पेट्रोल ग्रेड के लिए अलग आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखना संचालन को जटिल बनाएगा, लागत बढ़ाएगा और वितरण व्यवस्था की दक्षता को प्रभावित करेगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रीमियम पेट्रोल की तुलना E10 और E20 से करना उचित नहीं है, क्योंकि प्रीमियम ईंधन सीमित मात्रा में विशेष एडिटिव्स के साथ उपलब्ध कराया जाता है।

पुराने वाहनों को लेकर मंत्रालय ने कहा कि E20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल निर्माताओं से व्यापक परामर्श किया गया था और सभी प्रमुख कंपनियां आज भी पुराने और नए दोनों तरह के वाहनों की वारंटी का सम्मान कर रही हैं। इसका मतलब है कि उन्हें E20 से किसी बड़े तकनीकी जोखिम की आशंका नहीं है।

मंत्रालय ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें 1.5 करोड़ पुराने, गैर-E20 प्रमाणित वाहन शामिल थे। इन वाहनों में E20 के कारण जंग, असामान्य घिसाव या पुर्जों की क्षति जैसी कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई। हीरो मोटोकॉर्प ने भी इसी तरह का अनुभव साझा किया है।

हालांकि मंत्रालय ने माना कि कुछ वाहनों में E20 के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता में 3 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि E20 उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर दहन, स्मूद एक्सीलरेशन, इंजन की साफ कार्यप्रणाली और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे कई फायदे प्रदान करता है।

Related Articles

Back to top button