सरकारी कर्मचारी ने कलेक्टर के नाम से बांटे फर्जी नौकरी आदेश, 15 युवकों से लाखों की ठगी

राजस्थान के भरतपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। एक सरकारी कर्मचारी ने भरतपुर कलेक्टर के नाम से फर्जी नियुक्ति आदेश जारी कर करीब 15 बेरोजगार युवकों से 20 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर ली। ठगी का खुलासा तब हुआ, जब युवक ज्वाइनिंग के लिए संबंधित विभागों में पहुंचे और आदेश फर्जी पाए गए।
पीड़ित युवकों का आरोप है कि झुंझुनूं जिला अस्पताल में सहायक रेडियोग्राफर के पद पर कार्यरत सोनू कुमार मीणा ने उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। आरोपी फिलहाल प्रोबेशन पीरियड पर है। युवकों ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए पैसे दिए थे।
कलेक्टर और डायरेक्टर के नाम से फर्जी आदेश
आरोप है कि आरोपी ने भरतपुर कलेक्टर और चिकित्सा विभाग के डायरेक्टर राकेश कुमार शर्मा के नाम से फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कराए। इन आदेशों में सीएमएचओ भरतपुर और एसजेपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को पत्र लिखकर संविदा पर नियुक्ति और वेतन भुगतान के निर्देश तक दर्शाए गए थे।
ज्वाइनिंग के लिए पहुंचे तो खुली पोल
पीड़ित लोकेंद्र मीणा ने बताया कि पहले 5–10 दिन में ज्वाइनिंग लेटर मिलने का भरोसा दिया गया। बाद में कलेक्टर और डायरेक्टर के नाम से आदेश भेजे गए, लेकिन जब वे विभाग पहुंचे तो पता चला कि सभी दस्तावेज फर्जी हैं। पैसे वापस मांगने पर आरोपी ने चेक दिया, जो बाउंस हो गया।
आरोपी का दावा—मैंने पैसे नहीं लिए
वहीं आरोपी सोनू कुमार मीणा ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने किसी से नौकरी के नाम पर पैसे नहीं लिए हैं और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
पुलिस में शिकायत, जांच शुरू
पीड़ितों ने मामले की शिकायत भरतपुर कोतवाली थाना में दर्ज कराई है। घटना को लेकर भरतपुर, अलवर से लेकर झुंझुनूं तक चिकित्सा विभाग में चर्चा है। कलेक्टर कार्यालय का कहना है कि अभी तक औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है और पीड़ितों को उम्मीद है कि जल्द ही ठगी की रकम की बरामदगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।





